काम के दौरान हुई मजदूर की मौत

बक्सर, बिहार/चंद्र प्रकाश : देहाती क्षेत्र में रहने वालों के लिए आज के इस आर्थिक युग में अपने सपनों को पूरा करने के चाह लिए लोग अपना घर परिवार छोड़ कर मीलों दूर रहने को मजबूर हो जाते हैं। फिर भी वे अपनों से दूर होने की पीड़ा इस लिए सहते हैं क्योंकि, उनके भीतर अपने सपने को पूरा की जद्दोजहद होती है जो उन्हें इस पीड़ा को सहने का अभ्यस्त बना देती है। बावजूद इसके कभी -कभी नियति ऐसा खेल खेलती है। जब एक ही झटके में व्यक्ति के सारे सपने चकनाचूर हो जाते हैं। काल के चक्र ने कुछ ऐसा ही किया की पूरे परिवार पर संकटो का पहाड़ टूट जाता हैं। जिले के केसठ प्रखंड के कतिकनार पंचायत अन्तर्गर खरवनिया गांव निवासी धर्मेंद्र के साथ। धर्मेंद्र दिल्ली की एक बिजली कंपनी में नौकरी करने गया था। वहां पर ही बिजली का काम करते समय धर्मेंद हादसे के शिकार हो गए और एक ही पल में पूरे परिवार के सपने चकनाचूर हो गए। कंपनी वालो ने धर्मेद्र का शव उनके घर भिजवा दिया। शव घर पहुचते ही परिवार समेत पूरे गांव में मजदूर की मौत से कोहराम मच गया। उधर कंपनी वालों ने भी धर्मेद्र और उनके परिवार वालो से दगा करते हुए सहायता के नाम पर एक भी फूटी कौड़ी भी परिवार वालों को नहीं दी। आर्थिक तंगी के कारण धर्मेद्र के गरीब परिवार वालो से समक्ष शव के दाह संस्कार तक की समस्या खड़ी हो गयी। हालांकि इस दुःखद घड़ी में कुछ अन्य लोगों की मदद से किसी तरह मजदूर का दाह संस्कार तो कर ही दिया गया लेकिन हर व्यक्ति के समक्ष यह एक सवाल अभी भी बना हुआ है कि क्या सपने देखना और उनको पूरा करने के लिए संघर्ष करने वालों का यही हश्र होना चाहिए?

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