गुटखा पर प्रतिबंध संबंधी याचिका पर सरकार को नोटिस

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः राजधानी में गुटखा और चबाने वाले अन्य तंबाकू उत्पाद पर प्रतिबंध के सख्त क्रियान्वयन की मांग संबंधी याचिका पर हाई कोर्ट ने दिल्ली सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश जी रोहिणी और न्यायमूर्ति संगीता ढींगरा सहगल की खंडपीठ ने कहा कि सरकार इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब दाखिला करे। साथ ही सरकार बताए कि जब इस मुद्दे पर उसके द्वारा पहले से ही प्रतिबंध संबंधी सर्कुलर जारी है तो उसका पालन क्यों नहीं हो रहा है? मामले की अगली सुनवाई 2 मई को होगी। सुनवाई के दौरान दिल्ली सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि इस मुद्दे पर एकल पीठ ने अपने अंतिरम आदेश में तंबाकू बेचने और तंबाकू पदार्थ उत्पादकों के खिलाफ कार्रवाई करने पर रोक लगा रखी है। उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ष इस मुद्दे पर अधिसूचना जारी करती है। वह चाहते हैं कि गुटाखा और चबाने वाले अन्य तंबाकू उत्पाद पर प्रतिबंध संबंधी नियम सख्ती से लागू किए जाएं। यह याचिका एनजीओ फरियाद फाउंडेशन ने दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि दिल्ली सरकार ने 2015-16 में ही अधिसूचना जारी कर गुटखा और चबाने वाले अन्य तंबाकू उत्पादों की उत्पादन, बिक्री और भंडारण को प्रतिबंधित कर दिया था। लेकिन अभी तक इसे प्रभावी तरीके से लागू नहीं किया गया। याची के अनुसार, प्रतिबंध होने के बावजूद राजधानी में बड़े पैमाने पर गुटखा और चबाने वाले अन्य तंबाकू उत्पादों की बिक्री हो रही है। इनका उत्पादन करने वाली कंपनियां अधिसूचना को दरकिनार कर अभी भी अलग-अलग पाउच (एक में पान मसाला और दूसरे में तंबाकू उत्पाद) में बेच रही हैं। याची का आरोप है कि सिविक एजेंसियां इन कंपनियों पर कार्रवाई करने में नाकाम साबित हो रहीं हैं। इतना ही नहीं, इन एजेंसियों के अधिकारियों का कंपनियों से मिलीभगत है। ऐसे में अदालत सरकार के खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को मामले में ठोस कार्रवाई करने का आदेश दे। याची का दावा है कि चबाने वाले तंबाकू उत्पाद जैसे गुटखा, खैनी और जर्दा भारत में मौत के प्रमुख कारणों में से एक हैं। इनसे हर साल देश में करीब 9 लाख लोगों की मौत होती है।

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