शराब बरामदगी मामले में स्कॉरपियों को जप्ती सूची में नहीं डालने पर उत्पाद विभाग के विरुद्ध उठ रहे कई सवाल

सीवान, बिहार/दीपक कुमार सिन्हाः उत्पाद विभाग के शराब बरामद मामले में स्कॉरपियों को जब्ती सूची में नहीं डालने का मामला अब सवालों के घेरे में है।उत्पाद विभाग के बिहार में शराब बंदी पूर्ण रुप से सफल होने व अपनी झूठी उपलब्धियों को गिनाने और स्कॉरपियों मे कारोबारियों के साथ 10 बोतल शराब बरामदगी के मामले के बाद उत्पाद विभाग के अधिकारियों के काले चिट्ठे का पोल खुल रहा है। अब सवाल यह उठ रहा है कि शराब कारोबारी जलालपुर गांव के रोहित सिंह और तकीपुर गांव के रमेंद्र कुमार सिंह पास से मिले 10 बोतल शराब कारोबारियों के साथ स्कॉरपियों में थी या दोनों कारोबारी बगैर स्कॉरपियों के थे? जो सवालों के घेरे में है इस बात की चर्चा पुरे शहर में जोरों पर है हालांकि सौरभ कुमार शाह ने कहा की कारोबारियों के पास से स्कॉरपियों के साथ शराब बरामद किया गया है तो उसको भी जब्ती सूची में डाल देना चाहिए अगर जब्ती सूची में स्कॉरपियों को जप्त नहीं किया गया है तो यह नियम के विरुद्ध है। उन्होंने कहा कि उत्पाद विभाग की पुलिस ने किन परिस्थितियों में ऐसा नहीं किया है इसकी जांच की जाएगी इस मामले में उत्पाद विभाग के इंस्पेक्टर व उत्पाद अधीक्षक समेत सघन जांच अभियान में शामिल सभी अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि शराब बरामदगी मामले में कारोबारी या अधिकारी चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो उस पर करवाई हर हाल में की जाएगी। जबकि उत्पाद इंस्पेक्टर मनोज कुमार राय का कहना है कि स्कॉरपियों का मूल कागजात देखने के बाद छोड़ दिया जाएगा। शराब को स्कॉरपियों से बरामद नहीं किया गया है। अब सवाल यह है कि स्कॉरपियों उत्पाद विभाग के बैरक में आया कहां से? वही उत्पाद अधीक्षक अविनाश प्रकाश से पूछने पर उन्होंने कहा कि कार्रवाई करने वाला अधिकारी भी दोषी होगा तो उस पर कार्रवाई की जाएगी कानून एक के लिए नहीं सबके लिए बना है जिसका हर हाल में पालन किया जाएगा।

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