पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट जज के खिलाफ जारी किया अवमानना नोटिस

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में पहली बार सात जजों की बेंच हाईकोर्ट के वर्तमान जज के खिलाफ अदालत की अवमानना के मामले की सुनवाई करेगी। बुधवार को इस मामले की सुनवाई होगी। मामले में कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सी.एस. कर्णन को अवमानना नोटिस जारी किया। यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ ने जारी किया है। न्यायमूर्ति कर्णन को यह नोटिस हाईकोर्ट के अपने समकक्ष और अन्य न्यायाधीशों के खिलाफ लगातार आरोप लगाए जाने को लेकर भेजा गया है। सी एस कर्णन के खिलाफ अवमानना की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होगी। जस्टिस कर्णन ने कुछ दिन पहले प्रधानमंत्री को चिट्ठी लिखकर कई जजों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जांच की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने इसे अवमानना मानकर सुनवाई करने का फैसला किया है। पीठ ने कहा, ‘‘उन्हें उनके पास मौजूद सभी न्यायिक एवं प्रशासनिक फाइलें कलकत्ता हाईकोर्ट के महापंजीयक को लौटाने का आदेश दिया जाता है।’’ इसमें कहा गया है, ‘‘न्यायमूर्ति सी एस कर्णन को कारण बताओ की आगामी तिथि पर व्यक्तिगत रूप से पेश होंगे।’’ साथ ही पीठ ने न्यायमूर्ति कर्णन से न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्य अपने हाथ में न लेने के लिए भी कहा है। इस केस की सुनवाई चीफ जस्टिस और छह अन्य सीनियर जज-जस्टिस दीपक मिश्रा, जे चेलामेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर, पीसी घोष और कुरियन जोसफ की बनी बेंच करेगी। अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने न्यायामूर्ति कर्णन के सार्वजनिक संवाद को न्याय प्रशासन व्यवस्था को बदनाम करने वाला और अपमानजनक बताया। इस बीच, पीठ ने उच्चतम न्यायालय के पंजीयक को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया कि उसके आदेश की प्रति आज दिन में न्यायमूर्ति कर्णन को मिल जाए और उसने स्वत: संज्ञान लेते हुए उनके खिलाफ अवमानना याचिका को 13 फरवरी को आगामी सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। शुरूआत में अटार्नी जनरल :एजी: मुकुल रोहतगी ने न्यायमूर्ति कर्णन द्वारा कथित रूप से किए गए सार्वजनिक संवाद की प्रकृति का जिक्र किया और कहा कि वह न्याय प्रशासन व्यवस्था को बदनाम करने वाला और अपमानजनक है। उन्होंने पीठ से अपील की कि वह उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को निर्देश दे कि संबंधित न्यायाधीश को न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्य करने से रोका जाए। अटॉर्नी जनरल ने संवैधानिक प्रावधानों का जिक्र किया और कहा कि न्यायालय मामले का न्यायिक संज्ञान ले सकता है और उसके पास ऐसा आदेश देने का अधिकार है। उन्होंने कहा, ‘‘इस न्यायालय को न्याय के प्रशासन के मामले में उदाहरण पेश करना होगा। उच्चतम न्यायालय अवमानना के अधिकार क्षेत्र को प्रयोग करते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से न्यायमूर्ति कर्णन को प्रशासनिक और न्यायिक कार्य नहीं सौंपने को कह सकता है।’’ न्यायालय ने इस दलील पर ध्यान दिया और कहा कि यह पता लगाया जाना है कि न्यायमूर्ति कर्णन ने संवाद किया है या नहीं। न्यायालय ने कहा, ‘‘हमें अधिक से अधिक सावधानी बरतनी होगी।’’ उसने कहा, ‘‘हम उच्च न्यायालय के किसी मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ पहली बार कार्रवाई करेंगे और हमें ऐसा करते समय बहुत सावधानी बरतनी होगी ताकि आने वाले समय में यह प्रक्रिया मिसाल बन सके।’’ न्यायालय ने मद्रास उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ न्यायमूर्ति कर्णन द्वारा लिखे गए कथित अपमानजनक पत्रों के आधार पर उनके खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू की है। ये पत्र सीजेआई, प्रधानमंत्री एवं अन्य को संबोधित करते हुए लिखे गए हैं। न्यायमूर्ति कर्णन के कथित अवमानना करने वाले आचरण के लिए उन्हें मद्रास उच्च न्यायालय से कलकत्ता उच्च न्यायालय स्थानांतरित कर दिया गया था।

Share This Post

Post Comment