देश का सबसे बड़ा टीकाकरण अभियान रविवार से

नई दिल्ली/नगर संवाददाताःटीकाकरण का देश का अब तक का सबसे बड़ा विशेष अभियान रविवार से शुरू होने वाला है। इसके तहत नौ महीने से ले कर 15 साल तक के सभी बच्चों को मीजल्स-रुबेला टीका लगा कर पूरी नई पीढ़ी को इस संक्रमण से सुरक्षित किया जाएगा। इस अभियान का मकसद मीजल्स (खसरे) से होने वाली बच्चों की मौत को तो काबू करना है ही, साथ ही रूबेला सिंड्रोम के साथ पैदा होने वाले बच्चों के मामलों को भी इससे नियंत्रित किया जा सकेगा। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के वरिष्ठ सूत्र बताते हैं कि रविवार से शुरू हो रहे इस अभियान के तहत 41 करोड़ बच्चों तक इस टीके को पहुंचाया जाना है। इनमें से अधिकांश बच्चे मौजूदा टीकाकरण कार्यक्रम के तहत नहीं आते, इसलिए इन तक पहुंचना एक अलग तरह की चुनौती होगी। इससे पहले पोलियो टीकाकरण के लिए बहुत बड़ा कार्यक्रम चलाया जा चुका है। मगर उसके तहत सिर्फ पांच साल तक के बच्चों को दवा पिलानी होती है, जबकि मीजल्स-रुबेला टीके 15 साल तक के बच्चों को दिए जाएंगे। विशेष अभियान के तहत एक बार नौ महीने से ले कर 15 वर्ष तक के सभी बच्चों को यह टीका लगा दिए जाने के बाद इसे रुटीन टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल कर लिया जाएगा। तब नौ से 12 महीने के दौरान इसकी पहली और 16 से 24 महीने के बीच दूसरी खुराक दी जाएगी। पहले चरण में यह टीका कर्नाटक, तमिलनाडु, पुड्डुचेरी, गोवा और लक्षद्वीप में लगाया जाएगा। इन राज्यों में इस उम्र वर्ग में 3.6 करोड़ बच्चे हैं साथ ही यहां टीकाकरण कार्यक्रम बेहतर स्थिति में है। खसरा या मीजल्स बेहद संक्रामक बीमारी है और इससे भारत में सालाना लगभग 50 हजार मौत होती हैं। मौजूदा टीकाकरण कार्यक्रम में इसका टीका अलग से तो मौजूद है, लेकिन अब इसके साथ रुबेला को मिला कर दिया जाएगा। रुबेला की वजह से गर्भवती महिलाओं को कई तरह के खतरे हो सकते हैं। साथ ही पैदा होने वाले बच्चे में कोंजेनाइटल रुबेला सिंड्रोम (सीआरएस) होने की भी आशंका होती है जिसकी वजह से वह कई तरह के जन्मजात दोष के साथ पैदा हो सकता है। रुबेला भले ही गर्भवती महिलाओं को निशाना बनाता है, लेकिन इसको तभी समाप्त किया जा सकता है जब पूरी नई पीढ़ी में ही इस संक्रमण से लड़ने की क्षमता पैदा कर दी जाए। इसलिए 15 वर्ष तक के लड़के और लड़कियों सभी को यह टीका दिया जा रहा है।

 

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