राष्ट्र निर्माण के लिए आपसी भाईचारे और संगठन की आवश्यकता

नई दिल्ली/अरविंद कुमार यादवः “हमे अपने कल को सुनेहरा बनाना है। देश के परिवर्तन में अपना योगदान देकर एक सच्चे भारतीय बन दिखलाना है!” भारत माँ की यह पावन भूमि संतों और महापुरुषों की जन्म भूमि है जो चिरंकाल से सम्पूर्ण विश्व में धर्म और अध्यात्म के ज्ञान से प्रकाशित करती आ रही है। गुरुदेव सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के दिशा निर्देश में संस्थान विश्व शांति के उद्देश्य को लेकर कार्यरत है। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान ब्रह्मज्ञान द्वारा श्रेष्ठ मानवों का निर्माण कर पूरे विश्व में सत्यता, भाईचारे और धर्म को स्थापित करने हेतु संलग्न है। 68वें गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के दिव्य धाम आश्रम, नई दिल्ली में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

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हर देश की अपनी एक मुख्य पहचान होती है और भारत की मुख्य पहचान है अध्यात्म। भारत सदैव से ही जगत गुरु की उपाधि से विश्व भर में जाना जाने वाला देश है। अपनी पहचान और गौरव को पुनः स्थापित करने हेतु भारत माँ हर भारतीय से संकल्प की मांग कर रही है। इन्हीं भावों को लेकर देश-भक्ति व देश-प्रेम को पुनः जागृत करने हेतु- “संकल्प” कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसका लाभ हज़ारों की संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने उठाया। देशभक्ति व देश प्रेम के भजनों से पूरापंडाल दिव्य आभा और देशभक्ति की तरंगों में झूम उठा। गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं शिष्याओं ने अपने प्रवचनों में यह संदेश दिया कि कोई भी देश उत्तम नहीं होता, उसे उत्तम बनाया जाता है। यदि हम भारत को उत्तम पद्धति तक लेकर जाना चाहते हैं तो हम सबको एक होना होगा। एकता ही वह मार्मिक भेद है जिसके द्वारा भारत फिर से महान बन सकता है। आपसी एकता, सभी शक्तियों का संगठन और आत्मबल का समन्वयदृ इसी से ही भारत को पुनः महान बनाया जा सकता है। एकता में ही समाज हित है। एक बार फिर से भारत भूमि से अध्यात्मिक तरंगें उठी हैं जो बहुत जल्द विश्व के कोने-कोने को भेद देंगी। जरूरत है तो संगठित होकर, देश की शक्ति बनकर उसे उच्चता के शिखर पर ले जाने की। “भारत फिर से उठेगा शारीरिक बल से नहीं अध्यात्मिक बल से; विनाश के ध्वज से नहीं, शांति और प्रेम से। ”उठो, जागो और देखो आज भारत माँ पुकार रही ऐसे श्रेष्ठ मानवों को जो फिर से इस धरा को शांति प्रदान कर पूरे विश्व में शांति स्थापित कर सकते है।कार्यक्रम में उपस्थित सभी भक्त श्रद्धालु देश भक्ति के रंग में विभोर हो आनंदित हो उठे। उपस्थित भक्तों ने संकल्प भी लिया की वह बढ़-चढ़ कर देश के निर्माण में अपना योगदान देंगे और सम्पूर्ण विश्व में अध्यात्म और ब्रह्मज्ञान का सन्देश फैला कर “विश्व शांति” के स्वप्न को साकार करेंगे।

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