शराब बिक्री के मामले में झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा के बयान से आक्रोशित आदिवासी

पुरी, उड़ीसा/मनोज निशादः मुर्गापाड़ा, हब्बा-डब्बा एवं खुले में शराब बिक्री के मामले में झारखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री श्री मधु कोड़ा की बयान से आक्रोशित होकर आदिवासी “हो” समाज युवा महासभा के सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बुधवार को पाताहातु में पूर्व सीएम मधु कोड़ा को अपने आवास में सुबह-सुबह उनका घेराव किया। युवा महासभा के लोगों ने श्री कोड़ा द्वारा एसपी प. सिंहभुम को वार्षिक त्योहारों के अवसर पर मुर्गा लड़ाने की माँग पत्र देकर सदियों से पारंपरिक रूप से चली आ रही मनोरंजन खेल के उद्देश्य अनुरूप जिक्र करने की मामले सामाजिक तौर पर कड़ी आपति जतायी। लोगों ने मुर्गापाड़ा,हब्बा-डब्बा व शराब बिक्री पर सामाजिक नुकसान एवं लाभ पर महत्वपूर्ण जानकारिया देते हुए पर्यावरण व पशु क्रूरता प्रतिबंध अधिनियम उन्नीस सौ साठ तथा संशोधित अधिनियम उन्नीस सौ विरासी पर विस्तार से जिक्री कीं। पिछली वर्ष ईचागढ़ के विद्यायक श्री साधुचरण महतो एवं वर्षों पूर्व पोटका के पूर्व विद्यायक अमूल्य सरदार द्वारा मुर्गा लड़ाने पर पशु क्रूरता रोकथाम अधिनियम के उल्लंघन करने पर उनके विरूद्ध कानूनन कार्रवाई होने की घटना से श्री कोड़ा को अवगत करायी गयी। असामाजिक क्रियाकलापों में शामिल रहने से लोगों ने उनके खिलाफ भी सामाजिक और कानून दृष्टि से कार्रवाई कराने की सामाजिक चेतावनी दी। तुरंत बाद ग्रामीण मुण्डा सह युवा महासभा जगन्नाथपुर प्रखण्ड अध्यक्ष श्री नरकांत कोड़ा की अगुवाई में श्री कोड़ा के आवासीय परिसर पर बैठक आयोजित की गयी, बैठक के दरम्यान श्री कोड़ा ने आदिवासी “हो” समाज युवा महासभा सामाजिक संगठन की सक्रियता देखते हुये सभी सामाजिक पहलुओं पर अपनी गलती स्वीकार कीं और संगठन के लोगों से सामाजिक माफी माँग कर अपनी माँग  को समर्थन वापस लेने की सामाजिक बैठक में घोषित कीं। इस मामले में स्वयं भी मुर्गापाड़ा, हब्बा-डब्बा व खुले में शराब बिक्री के खिलाफ अभियान चलाने में सहयोग करने की अपनी इच्छा जतायी। युवा महासभा के कार्यकर्ताओं ने इस मामले में लोगों को जागरूक कर हर हालात में रोकथाम के अभियान पर आर-पार की लड़ाई लड़ने की श्री कोड़ा के समक्ष जंग छेड़ते हुये बात न मानने वालों को सामाजिक बहिष्कार कर जेल भेजवाने की चेतावनी भी दे दी। इस मौके पर भुषण लागुरी, गब्बरसिंह हेम्ब्रम, मंजीत कोड़ा, गणेश कोड़ा, समुयल लागुरी, बलराम लागुरी, अंजु अंगरिया, दासमा बोबोंगा, रोशन गागराई, क्रियाम हेम्ब्रम, लखन सिंकू, मनोज बोबोंगा, जनार्दन चातर, सोनाराम जेराई, संजीत बोबोंगा, मुण्डा बलराम बोबोंगा आदि काफी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।

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