विधि आयोग की सिफारिश, खाने मे मिलावट करने वालों को हो उम्र कैद की सजा

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः खाद्य पदार्थों में मिलावट को गंभीर मानते हुए विधि आयोग ने मिलावट के अपराध में कड़ा दंड दिए जाने की सिफारिश की है। आयोग ने सरकार को सौंपी रिपोर्ट में कहा कि अगर मिलावट की वजह से व्यक्ति की मौत हो जाती है तो सात साल से लेकर उम्रकैद तक की सजा होनी चाहिए। आयोग ने मिलावट से हुए नुकसान के आधार पर छह महीने से लेकर उम्रकैद तक की सजा और एक लाख से लेकर दस लाख तक के जुर्माने की सिफारिश की है। आयोग ने मिलावट के अपराध में सजा कड़ी करने के लिए भारतीय दंड संहिता (आइपीसी) में संशोधन की सिफारिश की है। विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस बीएस चौहान ने मंगलवार को खाद्य पदार्थो में मिलावट पर कड़ी सजा के प्रावधान की सिफारिश वाली 264 वी रिपोर्ट कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद को सौंपी। यह रिपोर्ट क्रिमिनल लॉ एमेंडमेंट बिल 2017 है जिसमें खाद्य पदार्थों में मिलावट पर सजा कड़ी करने की सिफारिश की गई है। गृह मंत्रालय ने पिछले वर्ष नवंबर में आयोग से खाद्य पदार्थो में मिलावट संबंधी आइपीसी की धारा 272 व 273 में संशोधन पर विचार करने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने मिलावटी दूध का मुद्दा उठाने वाली अच्युतानंद तीरथ की याचिका पर सुनवाई करते हुए सरकार से कहा था कि वह उत्तर प्रदेश व उड़ीसा राज्य की तरह आइपीसी की धारा 272 व 273 में उपयुक्त संशोधन करने पर विचार करें। इन दोनों राज्यों ने खाद्य पदार्थ में मिलावट पर उम्रकैद तक की सजा का प्रावधान है। आयोग ने माना है कि मिलावट के अपराध में सजा बहुत कम है। खाद्य पदार्थ में मिलावट मानव जीवन के लिए बड़ा खतरा है और इसके लिए कड़े दंड का प्रावधान होना चाहिए। रिपोर्ट में व्यक्ति को मिलावटी खाद्य पदार्थ खाने से हुई क्षति के हिसाब से कैद और जुर्माने के दंड की सिफारिश की है। साथ ही पीड़ित को मुआवजा दिए जाने की भी सिफारिश की गई है। आयोग ने फूड सेफ्टी एंड स्टैन्डर्ड एक्ट 2006 और आइपीसी की धारा 272 और 273 में मुकदमा चलाए जाने के बारे में मामला सुप्रीमकोर्ट में लंबित होने के कारण उस पर राय नहीं दी है। हालांकि रिपोर्ट मे कहा गया है कि फूड सेफ्टी और स्टैंडर्ड एक्ट के प्रावधान पूरी क्षेत्र को कवर नहीं करते इसलिए आइपीसी के प्रावधान बेकार नहीं माने जा सकते।

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