वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर, तत्काल कदम उठाने की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट

वायु प्रदूषण की स्थिति गंभीर, तत्काल कदम उठाने की जरूरत: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि वायु प्रदूषण की समस्या बहुत गंभीर है और इसका हल तत्काल निकालने की जरूरत है। शीर्ष अदालत ने कहा कि नियमों के क्रियान्वयन न होने और तंत्र के प्रभावी न होने के कारण बहुत से लोग वायु प्रदूषण के शिकार हो रहे हैं। न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायमूर्ति पी सी पंत की पीठ ने प्रदूषण से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि प्रदूषण की समस्या बहुत गंभीर है। अगर आप इसका समाधान निकालने में कई वर्ष लगाएंगे तो यह एक समस्या होगी। न्यायमित्र हरीश साल्वे ने अदालत को सूचित किया था कि प्रदूषण नियंत्रण सर्टिफिकेट (पीयूसी) को हर साल वाहनों के बीमा से जोड़कर 100 प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने की जरूरत है। इसके बाद ही पीठ ने यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि एक वर्ष की समयावधि काफी बड़ी है। वाहनों का बीमा हर साल किया जाता है। हमें इसका समाधान शीघ्र तलाशने की जरूरत है। पीठ ने केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल रंजीत कुमार को दिल्ली में पीयूसी केंद्रों की संख्या बताने को भी कहा। कुमार ने अदालत को बताया कि दिल्ली में ऐसे 962 केंद्र हैं और इनमें से प्रत्येक हर महीने 5000 वाहनों की जांच करता है। उन्होंने कहा कि इनमें से 174 केंद्रों को अनियमितता बरतने पर कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं। 14 केंद्रों का लाइसेंस रद्द किया जा चुका है और 75 को निलंबित किया गया है। साथ ही 78 केंद्रों को चेतावनी जारी की गयी है। सुप्रीम कोर्ट ने पीयूसी केंद्रों को जारी किए गए कारण बताओ नोटिस के संबंध में स्थिति रिपोर्ट पेश करने को भी कहा। साथ ही उसने पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण प्राधिकरण (ईपीसीए) को 962 पीयूसी केंद्रों की जांच कर उनकी गतिविधियों के बारे में रिपोर्ट सौंपने को कहा। केंद्र ने अदालत को यह भी जानकारी दी कि राजधानी दिल्ली और एनसीआर में फरनेस ऑयल और पेटकॉक की इकाइयों को बंद करने के संबंध में सभी पक्षों के साथ विचार विमर्श किया जा रहा है। इस मामले की अगली सुनवाई छह फरवरी को होगी।

 

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