ब्रह्मज्ञान द्वारा मानव के भीतर आत्मबल संभवः साध्वी अदिति भारती

ब्रह्मज्ञान द्वारा मानव के भीतर आत्मबल संभवः साध्वी अदिति भारती

नई दिल्ली/अरविंद कुमार यादवः दिल्ली स्थित रामलीला मैदान, पीतमपुरा में चल रही श्रीमद देवी भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के छटे दिवस की कथा बांचते हुए सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या कथा व्यास साध्वी अदिति भारती जी ने दुर्वासा ऋषि के श्राप से इंद्र के श्री विहीन होने और स्वर्ग से माता लक्ष्मी का पलायन व समुद्र मंथन से माता महालक्ष्मी के प्राकट्य व सावित्री सत्यवान की कथा प्रसंगों को रखा। इस विराट आयोजना के माध्यम से देवी माँ की विविध लीला चरित्रों का वर्णन किया गया। समुद्र मंथन से माता महालक्ष्मी के प्राकट्य की लीला का विश्लेषण करते हुए साध्वी जी ने श्रद्धालुओं के समक्ष अर्थ पुरुषार्थ में धर्म के आधार की अनिवार्यता को रखा।

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प्रसंग को भारत की स्थिति से जोड़ते हुए साध्वी जी ने कहा कि सोने की चिड़िया कहलाने वाला भारत आज गरीबी और भुखमरी, भ्रष्टाचार आदि समस्याओं से क्यूं जूझ रहा है क्योंकि आज भारतवासी अर्थ पुरुषार्थ तो कर रहे है परन्तु धर्म के आधार को भूल गए है। यदि भारत को उसका गौरव वापिस लाना है तो भारत वासियों को ब्रह्मज्ञान से जागृत कर धर्म से जुड़ना होगा। आज भारत वर्ष में धन और संसाधनों की कमी नहीं है कमी है तो परमार्थ, सद्भावना, त्याग जैसे मानवीय मूल्यों की जो अध्यातम से पूरित प्राचीन भारत के लोगों में भरपूर पाए जाते थे। मानव के भीतर इन्ही मूल्यों को जागृत करने के लिए एक सद्गुरु ब्रह्मज्ञान प्रदान कर मानव के भीतर उस साधना रुपी समुद्र मंथन को छेड़ते हैं जिससे उसे गुणों की निधि प्राप्त होती है। सावित्री सत्यवान की कथा के माध्यम से साध्वी जी ने समाज के समक्ष इस कथा के गुडार्थ को रखते हुए बताया कि यह मात्र एक आदर्श दाम्पत्य की कथा नहीं अपितु ब्रह्मज्ञान के आधार पर मानव के भीतर की सावित्री रुपी आत्मबल के जागरण की गाथा है। यह आत्म बल ही मृत्यु के भय से आक्रांत मानव जाती को अमरता की ओर ले जाने का दम रखती है। उदहारण स्वरुप स्वामी विवेकानंद, योगानंद परमहंस, प्रहलाद, महर्षि अरविन्द आदि का वर्णन किया गया। साध्वी जी ने बताया की आज सर्व श्री आशुतोष महाराज जी ने भी ब्रह्मज्ञान प्रदान कर सैंकड़ों लोगों के भीतर उस आत्मबल को जागृत किया है जो आज समाज को जागृत करने में बढ़ रहे है। साध्वी जी ने बताया की मानव के भीतर गुणों का प्रकटीकरण और आत्मबल का सृजन करने वाली अध्यात्मिक क्रांति ही विश्व शांति के महान लक्ष्य को सिद्ध करने का आधार है। कथा के अंतिम चरणों में संगीतमय माता महालक्ष्मी और भगवान विष्णु के विवाह उत्सव में श्रद्धालुओं ने बढ़ चढ़ कर भाग लिया।

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