बसों का किराया घटाने से पहले सुविधा बढ़ाएं- मुद्दा

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः राजधानी में बसों का किराया कम करने का फैसला जल्दबाजी में बिना किसी योजना और रणनीति के लिया गया है। यात्री टिकट की कीमत करने से कोई फर्क नहीं पड़ता। जब तक राजधानी में बसों की पर्याप्त संख्या और सुविधाएं नहीं होंगी तब तक लोग इनमें नहीं बैठेंगे। पांच साल पहले तक राजधानी की मेट्रो में बड़ी गाड़ियों से चलने वाले लोग भी आते थे क्योंकि वह गाड़ी पार्क करने के बाद मेट्रो से अपने आफिस जाते थे। आज यह स्थिति नहीं है। मेट्रो में बढ़ रही भीड़ के कारण अब लोग वापस अपनी गाड़ियों पर आ गए हैं। बस में भी इसी तरह की दिक्कत होगी। यह तब तक लागू नहीं करना चाहिए जब तक बसों की संख्या में इजाफा न हो जाए और इसकी उपलब्धता बेहतर न हो जाए। सरकार बसों में बच्चों और बूढ़ों को मुफ्त टिकट दे रही है, लेकिन उनको पैसों का लालच नहीं सुविधाएं चाहिए। दिल्ली की सड़कों में भी सुधार की जरूरत है। महिलाओं की सुरक्षा सहित अन्य चीजों पर भी ध्यान देना चाहिए। पहले बसों में रात में गार्ड रखने की व्यवस्था थी, जो अब नहीं दिखती। यह भी समीक्षा जरूरी है कि पूर्व में लागू कितनी योजनाएं लोगों तक पहुंच रही हैं। यदि पांच या तीन मिनट पर इसकी सुविधा हो तो लोग बसों में आएंगे। एक बड़ी समस्या जाम और अवैध पार्किंग की भी है जिससे स्थितियां बिगड़ी हैं। राजनीति के कारण पुलिस और प्रशासन के अधिकारी एक्शन नहीं लेते। जहां अवैध वाहन खड़े होते हैं, वहां अवैध दुकानें भी बढ़ी हैं। आवासीय क्षेत्र में 50 फीसद सड़क का ही इस्तेमाल होता है। ¨रग रोड पर ही विजय घाट से भैरो मार्ग तक पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। बसों में किराया कम होने पर सरकार के लिए मुसीबत भी आ सकती है। क्योंकि कुछ लोग बिना वजह के भी बसों में यात्रा करेंगे और फिर भार बढ़ेगा। इसलिए किराया कम करने से पहले सुविधा बढ़ाने पर सरकार को ध्यान देने की आवश्यकता है। क्योंकि यदि सुविधा बेहतर है तो लोग अधिक किराया भी दे देंगे लेकिन किराया घटा देने से बसों में सुरिक्षत यात्रा या बेहतर सेवा की गारंटी अभी नहीं है।

 

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