नोटबंदी की वजह से पूर्व कांग्रेस सरकार का सबसे बड़ा घोटाला

मुंबई, महाराष्ट्र/विशाल गांधीः नोटबंदी की वजह से पूर्व कांग्रेस सरकार का सबसे बड़ा घोटाला सामने आने वाला है। सोनिया गाँधी और मनमोहन सिंह पर बहुत बड़ा संकट आने वाला है, इन्हीं को बचाने के लिए कांग्रेस ने पूरी ताकत लगा दी है। इन्हीं को बचाने के लिए कांग्रेस नोटबंदी के आदेश को रद्द कराने के लिए जी जान से लगी है। कांग्रेस के पास नोटबंदी को रद्द कराने का एक ही उपाय है और वह है सुप्रीम कोर्ट। इस वक्त कांग्रेस ने अपने वकीलों की पूरी फ़ौज सुप्रीम कोर्ट में खड़ी कर दी है। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस के दर्जनों वकील नोटबंदी के खिलाफ याचिकाओं की पैरवी कर रहे हैं। अब आप सोचिये सुप्रीम कोर्ट में नोटबंदी के खिलाफ याचिकाएं कौन डाल रहा है और इन याचिकाओं की पैरवी आखिर कांग्रेसी सांसद ही क्यों कर रहे हैं, क्या नोटबंदी की पैरवी करने के लिए कांग्रेस वकील ही बचे हैं। सलमान खुर्शीद, कपिल सिब्बल, पी. चिदंबरम, अभिषेक मनु सिंघवी, विवेक तनखा, के.टी.एस. तुलसी जैसे धुरंधर कांग्रेसी वकील नोटबंदी का आदेश रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जी जान लगा दे रहे हैं। क्या सच में सबसे बड़ा घोटाला सामने आने वाला है। कई नेता कह रहे हैं कि नोटबंदी सबसे बड़ा घोटाला है, कुछ लोग कह रहे हैं कि नोटबंदी से देश बर्बाद हो गया, कुछ लोग कह रहे हैं कि नोटबंदी से सैकड़ों लोग मर गए। आज सबसे बड़ा बयान कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गाँधी ने दिया, उन्होंने कहा कि नोटबंदी इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है, वह यह बात संसद में बोलेंगे तो भूकंप आ जाएगा और वहां मोदीजी बैठ नहीं पाएंगे। उन्होंने कहा कि मोदी उनके सामने आने से डर रहे हैं, एक बार मोदी उन्हें मिल गए तो वे उन्हें पकड़कर समझा देंगे। राहुल गाँधी ने एक बात तो माना कि उनकी सरकार में भी घोटाले हुए हैं और नोटबंदी देश का सबसे बड़ा घोटाला है। हम यह तो नहीं कह सकते कि नोटबंदी देश का सबसे बड़ा घोटाला है लेकिन इतना जरूर कह सकते हैं कि नोटबंदी देश में हुए सबसे बड़े घोटाले का पर्दाफाश कर सकती है और यह घोटाला इतना बड़ा हो सकता है कि देश में सच में भूकंप आ सकता है। सभी के पैरों तले जमीन खिसक सकती है और पूरी की पूरी कांग्रेस पार्टी उसमें समा सकती है। आपको मालूम होगा कि आरबीआई ने अब तक 1000 और 500 रुपये कीमत के 14.5 लाख करोड़ रुपये जारी किये थे। नोटबंदी के बाद आज तक 12 लाख करोड़ रुपये जमा हो चुके हैं। नोटबंदी के बाद 30 दिन बीते हैं और अभी भी पुराने नोट जमा करने के 20 दिन बाकी हैं। अब आप सोचिये, क्या अब केवल 2.5 लाख करोड़ रुपये ही जमा होने बाकी हैं। 20 हजार रुपये तो मेरे पास ही हैं। मैंने अब तक इसलिए पैसे जमा नहीं किये हैं क्योंकि मै भीड़ कम होने का इन्तजार कर रहा हूँ। मेरे जैसे कितने लोग होंगे जो भीड़ ख़त्म होने का इन्तजार कर रहे होंगे। मै इसलिए भी भीड़ खत्म होने का इन्तजार कर रहा हूँ क्योंकि मेरे अकाउंट में पहले से पैसे जमा थे और मेरा काम चल रहा है। मेरे जैसे कितने लोग होंगे जो अब तक अपना काम चला रहे होंगे और भीड़ ख़त्म होने या कम होने का इन्तजार कर रहे होंगे। अब आप सोचिये, अगर आरबीआई में 14.5 लाख करोड़ रुपये से ऊपर जमा हो गए तो क्या होगा, अगर 20 लाख करोड़ रुपये जमा हो गए तो क्या होगा, अगर 25 लाख करोड़ रुपये जमा हो गए तो क्या होगा। इस पांच लाख या 10 लाख करोड़ रुपये का हिसाब कौन देगा। क्या आरबीआई बताएगा कि जब उसने केवल 14 लाख करोड़ रुपये जारी किये थे तो देश में 20 लाख करोड़ रुपये कहाँ से आ गए। अगर 20 लाख रुपये जमा हुए तो देश में 6 लाख करोड़ का घोटाला सामने आएगा और अगर 25 लाख करोड़ जमा हुए तो 11 लाख करोड़ रुपये का घोटाला सामने आएगा। पांच लाख करोड़ का घोटाला अबतक का देश का सबसे बड़ा घोटाला होगा। जानकारी के लिए बता दें कि अभी तक लाखों धनकुबेरों ने भी अपना कालाधन बैंकों में जमा नहीं किया है। अगर उन्होने सरकार को जुर्माना देकर अपना कालाधन जमा कर दिया और ऐसे लोगों ने 2-3 लाख करोड़ रुपये भी जमा कर दिए तो यह घोटाला और बड़ा हो सकता है। अब आप सोचिये, इस पांच-छह-सात लाख करोड़ रुपये के घोटाले का जिम्मेदार कौन होगा, मोदी सरकार को देश में आये 2 ही वर्ष हुए हैं, उन्होंने अब तक रुपये भी नहीं छापे होंगे, अब सवाल यह उठता है कि क्या बैंकों में नकली नोट जमा हुए हैं, ऐसा होना भी असंभव है क्योंकि बैंक वालों को नकली नोटों की पहचान होती है और वे एक एक नोटों को चेक करके रूपया जमा करते हैं। दूसरा प्रश्न यह उठता है कि क्या आरबीआई ने एक ही सीरियल नम्बर के कई नोट छाप रखे थे। ऐसा क्यों किया गया था। क्या राजनीतिक फायदे के लिए ऐसा किया गया था। अगर ऐसा किया गया था तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। क्या इसका जिम्मेदार पूर्व कांग्रेस सरकार है। निश्चित तौर पर। क्या इसके जिम्मेदार पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह हैं। निश्चित तौर पर हैं। क्या इसके जिम्मेदार पूर्व गवर्नर रघुराम राजन भी हैं। निश्चित तौर पर हैं। क्या इसके जिम्मेदार सोनिया गाँधी हैं। निश्चित तौर पर हैं क्योंकि कांग्रेस सरकार सोनिया गाँधी के ही इशारों पर चलती थी और ऐसा कहा जाता है कि मनमोहन सिंह तो उनके हाथों का रिमोट कंट्रोल थे। अब आप सोचिये कि कांग्रेस ने नोटबंदी का आदेश वापस लेने के लिए पूरी ताकत क्यों लगा रखी है। सुप्रीम कोर्ट में दर्जनों वकीलों की फ़ौज क्यों लगा रखी है, सभी रचिकाओं की पैरवी कांग्रेस सांसद जो कि सुप्रीम कोर्ट में वकील भी हैं, क्यों कर रहे हैं। क्या नोटबंदी की पैरवी करने के लिए कांग्रेस वकील ही बचे हैं। सलमान खुर्शीद, कपिल सिब्बल, पी. चिदंबरम, अभिषेक मनु सिंघवी, विवेक तनखा, के.टी.एस. तुलसी जैसे धुरंधर कांग्रेसी वकील नोटबंदी का आदेश रद्द कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जी जान लगा दे रहे हैं। क्या कांग्रेसी सांसदों को भी इस सबसे बड़े घोटाले के एक्सपोज होने का डर सता रहा है, निश्चित तौर पर डर सता रहा होगा वरना संसद में नोटबंदी पर चर्चा करने के बजाय सुप्रीम कोर्ट में खुद ही याचिकाएं डलवा कर उसकी खुद ही पैरवी नहीं करते। सिर्फ एक हफ्ते में पता चल जाएगा कि रिज़र्व बैंक में कितना रूपया जमा हुआ है, निश्चित तौर पर अगले एक हफ्ते में रिज़र्व बैंक में 20 लाख करोड़ रुपये जमा हो चुके होंगे और 6 लाख करोड़ रुपये का घोटाला सामने आ चुका होगा। कल भारतीय जनता पार्टी ने संसद में इसीलिए चर्चा से परहेज किया क्योंकि वे इस घोटाले के पर्दाफाश होने का इन्तजार कर रहे हैं। अगर बैंकों में 14.5 लाख करोड़ रुपये से एक भी रुपये ऊपर जमा हुए तो वे पूर्व कांग्रेस सरकार से पूछेंगे कि ये रुपये कहाँ से आ रहे हैं। आपने तो 14.5 लाख करोड़ रुपये ही छापे थे। अगर बैंकों में 20 लाख करोड़ रुपये जमा हुए तो मोदीजी कांग्रेस से पूछेंगे कि ये 6 लाख करोड़ रुपये कहाँ से जमा हो गए आपने तो 14 लाख करोड़ ही छापे थे। अब आप पूरी पार्टी मिलकर इस 6 लाख करोड़ का हिसाब बताओ, वरना जेल में जाओ।

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