भगवान ने बुराइयों पर अच्छाई की जीत के जरिए सदैव सच्चाई के मार्ग पर चलने का दिया सन्देश

भगवान ने बुराइयों पर अच्छाई की जीत के जरिए सदैव सच्चाई के मार्ग पर चलने का दिया सन्देश

नई दिल्ली/अरविंद कुमार यादवः दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के दिल्ली स्थित दिव्य धाम आश्रम में मासिक अध्यात्मिक भंडारे का आयोजन किया गया। जिसमे सर्व श्री आशुतोष महाराज जी के शिष्य एवं शिष्याओं ने आई हुई संगत को अध्यात्मिक विचारों द्वारा अनुशासित जीवन जीने की कला से अवगत कराया। साध्वी जी ने बताया कि अशांति का मूल कारण मानव मन की अशांति है। इस मन को शांत करने हेतु मानव को ब्रह्मज्ञान की नितांत आवश्यकता है। जब मानव सहज आनंद में आ जाएगा, तभी समाज, राष्ट्र व विश्व में शांति स्थापित की जा सकती है। आज जहाँ संसार तनाव, थकान, भीड़ और बेचैनी जैसी परेशानियों से ग्रसित है, वहीं उसके लिए मन की शांति सर्वश्रेष्ठ आवश्यकता है। यह एक ऐसा खजाना है जिसकी इच्छा सभी रखते हैं लेकिन कुछ ही लोग इसका लाभ प्राप्त कर पाते है।

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प्रायः अच्छी वित्तिय स्थिति और अच्छा स्वास्थ्य होने के बावजूद भी लोगों के पास आंतरिक सुख नहीं है, जिससे यह सिद्ध होता है की परम शांति बाहरी संसाधनों पर निर्भर नहीं करती और न ही किसी तकनीकी प्रगति पर निर्भर करती है। इसे भीतरी जगत में उतर कर ही जाना जा सकता है। साध्वी जी ने बताया कि संस्थान की तरफ से युवाओं पर भी अधिक फोकस किया जा रहा है जिसके तहत श्री आशुतोष महाराज जी युवाओं के रगों में अध्यात्म का संचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संस्थान की तरफ से युवाओं को नशे से दूर करने के लिए व्यापक मुहिम चलाई जा रही है। इसमें युवाओं को नशे से दूर कर समाज के सभ्य नागरिक बनाने हेतु जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भक्त प्रहलाद के पिता हिरण्य कश्यप ने उसे भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोका था। इसके लिए वह अपने पुत्र के भक्ति मार्ग में अनेक बाधाएं खड़ी करते रहे। जबकि जो इंसान सत्य जान चुका होता है वह न तो असत्य को स्वीकार करता है और न ही अपने मार्ग में आने वाली बाधाओं से विचलित होता है। इसलिए प्रहलाद के जीवन में इतनी बाधाएँ आने के बाद भी वह अपने भक्ति मार्ग से विचलित नहीं हुआ और एक दिन यही लगन उसे प्रभु से मिला पायी। भक्त प्रहलाद भी युवा थे और आज के युवा में भी इस तरह के जज्बे की नितांत आवश्यकता है। युवा नदी के वेग की तरह शक्ति की धारा है जो अपने भीतर नवीन परिवर्तन व सृजन के रत्नों को समेटे हुए है। विडंबना यह है कि युवा वर्ग तेजी के साथ विपरीत दिशा की तरफ से बढ़ रहा है। नशे सहित कई तरह की बुराइयों में फंसकर न सिर्फ अपना बल्कि देश का भविष्य भी दाव पर लगा रहा है। इसीलिए उसे इससे बचने के लिए गुरु की शरण में आ कर परमात्मा की भक्ति से जुड़ना होगा।

 

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