हरा भरा बेंगलुरु से स्टील बेंगलुरु

कर्नाटक, हरिसाः बेंगलुरु कर्नाटक की राजधानी है जो दक्षिण भारत का एक राज्य है। वैसे इस साल बेंगलुरु काफी सुर्खियां में रहा जिसमें सर्वोच्च कथित भ्रष्टाचार और वरिष्ठ पुलिस कानस्टेबलों द्वारा हड़ताल करना आधुनिक पराडंडी और सड़क के लिए सरकार का नया मंत्र कर्नाटक और तामिलनाडु के बीच कावेरी जल विवाद पर हिंसा इत्यादि।
सताधारी पार्टी द्वारा सत्ता की बेशर्मी का स्पष्ट दिखावे से बेंगलुरु वासियों को जागरूक करना जो करदाताओं क प्रस्तावित राशी 1800 करोड़ रुपये का फ्लाईओवरर में निवेश करने का प्रस्ताव है। शहर के दिल से अन्तर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को जोड़ना जिसके लिए 6.72 कि.मी. का एक वी.आई.पी. फ्लाईओवर का निर्माण करना है। इसकी उम्मीद है कि यह शहर के यातायात को कम करेगा। बेगलुरु के आम नागरिक को समारूढ पार्टी की योजना से आक्रोश है। योजन के अनुसार फ्लाईओवर के रास्ते में आने वाले लगभग 800 से अधिक पेड़ को काटा जायेगा जो पेड़ बेंगलुरु को छाया अदान प्रदान करते हैं जो यहां के तापमान को सामान्य रखते हैं और प्रदूषण पर नियंत्रण रखते हैं। बेंगलुरु के कार्यकर्ता और बेंगलुरु प्रेमी सरकार की इस धुष्टता से नाराज है। आधुनिक पगडंडी और सड़क के लिए पेड़ काट दिए गये हैं। यहां नये पेड़ के साथ उन स्थानों की भरपाई करने के लिए दुबारा करदाताओं के 1000 करोड़ का बजट रखा लेकिन पराडंडी ऐसी बनी कि वहां पर कोई छाया-प्रदान पेड़ नहीं उग सकता है ऐसा कहना है शेशाद्री (हरियाली विशेषक बेंगलुरु) को माननीय मुख्यमंत्री श्री सिधराम्मय्या और उनके मंत्री मंडल के सदस्यों का कहना है कि बेंगलुरु के यातायात पर नियंत्रण के लिए अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा तक यह फ्लाईओवर आवश्यक है। मुख्यमंत्री और उनके सारे मंत्रियों ने के.जी चार्ज का बचाव किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना जनता के लिए पुरी तरह से पारदर्शीत है।
मुख्यमंत्री ने कहा बेंगलुरु विजिन ग्रुप (बी.एस.जी) बनाया गया है। जिसमें यहां के कुछ प्रतिष्टिता एवं राज्य के अग्रणी व्यापार हस्तिया शामिल है मंत्री जी ने अपने निर्णय में कहा कि उन्होंने इस बी.वी.जी के साथ विचार विर्मश के बाद यह मंजूरी दी है। लेकिन बी.वी.जी. के मुख्य सदस्यों का कहना है कि ऐसा कोई विचार विमर्श नहीं हुआ। बेगलुरु काफी तेजी से बढ़ रहा है। यहां की आवादी भी तेजी से बढ़ रहा है। इसका नजीजा यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर का बढ़ना इस वजह से सड़क यातायात से ज्यादा विकास हुआ है। जिससे टॉफिक जाम और उसका असर सड़क पर चालकों द्वारा शेष प्रकट करना है। शेष अकट करते से जरूरी है कि सड़क के बुनियादी प्रबधन को समझना।
ऐसा लगता है कि निर्माताओं ने जान बुझकर यातायात भीड़ को सुनिश्चत किया है। जैसे यहां की भीड़, ट्रॉफिक निराशा और आम लोगों से सुरक्षा दिखलाना फिर उन्हें भरोसा दिलाना की फ्लाईओवर से ही यह सारी समस्याओं का समाधान मिलेगा। निराशाजन वाहनों की धीमी गति से परेशान हताशा निराश होकर ऐसी बेहुदा समाधान के लिए तैयार हो जाते हैं।
बेहुदा समाधान से सामान्य से समझकर यतायात प्रबंधन को विशेष रूप से बेहतर संबंध बनाने और यातायात का सही करना। दिशाओं को निर्माता बनना, निरंतर गति से वाहनों की आवाजाही सड़क की लम्बाई को मद्देनजर रखते हुए सुधार सार्वजनिक परिवहन कह कम दरे, सुचारू रूप से सडकों की मरम्मत इत्यादि से सभी परियोजना में आवंटित खर्च को ध्यान में रखते हुए सरकार ने केवल अभिजात वर्ग को पूरा करने का फैसला किया है। इस निर्माण से ज्यादा अंतर नहीं होगा। सिर्फ दस मिनट का कम वक्त लगेगा। इसका सरकार के खिलाफ विरोधउ के बावजूद एक स्टील फ्लाईओवर स्थापित करने की परियोजनिक जन एक जुट हो गए हैं। सोशल मीडिया में सभी की नाराजगी झलक रही है। (बेडा) एक कन्नड शब्द है जिसका मतलव नहीं है। 16 अक्टूबर का एक विशाल रैली निकाली गई थी। जिसमें 6,000 से ज्यादा लोग शामिल हुए। जिसमें पूर्व न्यायाधिश संतोष हेगडे बीजेपी के एम.पी. पी.सी. मोहन बच्चे सिनियर सिटिजन सभी के साथ शामिल थे मानव श्रुंखला की एक प्रभावी रैली स्टील फ्लाईओवर के खिलाफ देखा गया। अब दिल थाम कर देखना है कि क्या सरकार अब दिल थाम कर देखना है कि क्या सरकार इस अटल रह कर स्टील फ्लाईओवर शुरू करती है या नहीं।

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