ज्वैलरी की खरीद कर काला-धन खपाना आसान नहीं होगा

नई दिल्ली। काले धन के तंत्र की कमर तोड़ने में जुटी सरकार की अब वैलरी की बिक्री पर टेढ़ी नजर है। वह ज्वैलर्स पर करीब से नजर रख रही है। टैक्स अधिकारियों को शक है कि पैन नंबर से बचने के लिए वे दो लाख रुपए से अधिक की बिक्री टुकड़ों में दिखा रहे हैं। 500 और 1000 के नोटों के बंद किए जाने के बाद सोने-चांदी के कारोबार में तेजी आई है। बताया जा रहा है कि काली कमाई को खपाने के लिए इन धातुओं में निवेश किया जा रहा है। पिछले हफ्ते सोना 50,000 रुपए प्रति दस ग्राम तक के भाव पर बेचा गया। यह इसके बाजार मूल्य 31,000 रुपए प्रति दस ग्राम से काफी यादा था। कीमती धातुओं के जरिए काली कमाई को सफेद करने के लिए 20 से 40 फीसद तक का कमीशन भी लिया गया। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन सुशील चंद्रा ने बताया कि दो लाख से अधिक की ज्वैलरी बेचने पर पैन नंबर अनिवार्य है। जहां भी नियम तोड़े गए होंगे, आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। नकदी जमा का मामला हो या फिर पुराने नोटों से सामान खरीदने का, विभाग की हर लेनदेन पर नजर है। पुराने बैंक कर्मी रखे जाएंः नोटों की अदला-बदली और नकदी निकासी के काम को रफ्तार देने के लिए सरकार को बैंकों को सेवानिवृत्त कर्मचारियों को रखने की अनुमति देनी चाहिए। उद्योग संगठन एसोचैम ने यह सुझाव दिया है।

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