कानपुर के हजारों वर्ष पुराने मंदिर में दशहरा पर होती है रावण की पूजा

कानपुर, युपी/अनिल कुमारः कानपुर के शिवाला नगर के इस अनोखे मंदिर में आज सुबह से रावण की पूजा की जा रही है। मंदिर 2004 साल पुराना है। जहां हर वर्ष दशहरा के दिन रावण की पूजा-अर्चना की जाती है।कानपुर (जेएनएन)। भारत के साथ ही विदेशों में विजयादशमी के दिन असत्य पर सत्य की जीत के उपलक्ष्य में रावण का पुतला दहन किया जाता है। इसके विपरीत कानपुर में दो हजार वर्ष से पहले का एक मंदिर है जहां पर रावण की पूजा की जाती है। कानपुर के शिवाला नगर के इस अनोखे मंदिर में आज सुबह से रावण की पूजा की जा रही है। मंदिर 2004 साल पुराना है। जहां हर वर्ष दशहरा के दिन रावण की पूजा-अर्चना की जाती है। विजयादशमी के दिन यहां हजारों की संख्या में भक्त रावण की पूजा करते हैं। यह मंदिर माता दुर्गा का है जहां रावण का अलग से मंदिर बनाया गया है। दरअसल रावण की मूर्ति की स्थापना यहां पर माता के दरबारी के रूप में की गयी थी। जिसकी हर वर्ष दशहरे के मौके पर पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि रावण का जन्म और मृत्यु एक ही दिन हुई थी। आज रावण का जन्म दिवस भी है। इसी के चलते सुबह मंदिर के पट खोले जाते हैं और विधि विधान के साथ उनकी पूजा की जाती है। रात में जब रावण के पुतलों का दहन हो जाता है तो उसके बाद मंदिर के पट एक साल के लिए बन्द कर दिए जाते हैं। भागवान श्री राम के पूरे विश्व में हजारों लाखों मंदिर हैं, लेकिन देश में रावण के चुनिन्दा मंदिर ही हैं। जिनमें कानपुर का यह मंदिर भी शामिल है। दशानन के इस मंदिर को जल्द ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने वाली है।

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