सुपुर्दे ख़ाक हुए शहीद थानाध्यक्ष कोठी कयामुद्दीन

पटना, बिहार/शिवशंकार लालः कर्तव्य की बलि वेदी पर अपने प्राणों की आहुति देकर बिहार पुलिस की गौरवगाथा में अमर चरित्र बन गए मकतूल कयामुद्दीन अंसारी। गया में अपराधियों की गोली का शिकार हुए 2009 बैच के दारोगा सह कोठी थानाध्यक्ष कयामुद्दीन अंसारी की नमाजे जनाज़ा उनके पुश्तैनी घर अलीनगर औरंगाबाद में अता की गई। फिर नम आँखों से परिजनों और तमाम शुभचिंतकों की मौजूदगी में मकतूल दारोगा को मदरसा स्थित कब्रगाह में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। सैकड़ो लोगो ने नम आखों से अपने हरदिल अज़ीज़ जांबाज बेटे कयामुद्दीन को आखिरी विदाई दी। विदित हो की सोमवार की सुबह कोठी थाना प्रभारी कयामुद्दीन अंसारी की हत्या के बाद सोमवार की दोपहर मगध मेडिकल कॉलेज के पोस्टमॉर्टम हाउस के बाहर शहीद दारोगा के पिता मो. सराजुद्दीन अंसारी, मंझले भाई मो. नईम अंसारी, दो ममेरी बहनें और पैतृक गांव से आए लोगों की भीड़ लगी थी। वही मो. नईम अंसारी ने बताया कि छुट्टी में औरंगाबाद आने पर क्यामुद्दीन शाने अली की चर्चा करते थे। हाल में ही क्यामुद्दीन अंसारी ने शाने अली के चचेरे भाई लल्लू की पुलिस के साथ अभद्र व्यवहार करने पर पिटायी की थी। उन्होंने बताया कि मेरे बड़े भाई के हत्यारों को खोजकर कड़ी से कड़ी सजा दिलायी जाए। वही शहीद दारोगा के पिता मो. सराजुद्दीन अंसारी का रो-रोकर बुरा हाल था। पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि क्याम (घर का पुकारू नाम) हमेशा ही बड़े भाई का फर्ज निभाया। दिल्ली में इंजीनियरिंग कर रहे छोटे भाई आदिल की पढ़ाई पर पूरा ध्यान रखता था। सोमवार की देर शाम उनके शव को गया से उनके पैतृक निवास अलीनगर लाया गया। शहीद का शव के घर पहुंचते ही कोहराम मच गया और परिजनों की चीखो पुकार से पूरा माहौल ग़मज़दा हो गया। जांबाज शहीद का शव के अंतिम दर्शन के लिए हजारों की संख्या में आस पास के इलाकों के लोगो का ताता लग गया। अलीनगर के अंसारी परिवार के घर के आस-पास के तमाम लोग खुशमिज़ाज़ और बेहद मिलनसार कयामुद्दीन के संग बिताये गए लम्हो को याद कर जार जार हो कर रो रहे थे। वही सरकारी टीचर से दारोगा बने कयामुद्दीन बेहद जहीन और दिलदार किस्म के निडर थे। वही मकतूल कयामुद्दीन की पत्नी स्कूल शिक्षिका अंजुम आरा और उनके बच्चे बड़ी बेटी नायला अंजुम जो आईएससी, मंझली बेटी अलिसा क्याम नौवीं, छोटी बेटी शानिया क्याम सातवीं और बेटा वैस रजा पांचवीं कक्षा में पढ़ते हैं शव से लिपट कर जार जार रो रहे थे।बच्चो के बहते आँसू देखकर मौजूद लोगो भी रह रह कर फफक पड़ रहे थे। वही मकतूल दारोगा के सहकर्मी रहे आफताब राणा और युसूफ आजाद अंसारी ने नम आँखों से कहा कि अल्लाह कभी भी उन दरिंदो को माफ़ नही करेंगे जिन्होंने ऐसा जघन्य काम किया है। एक ऐसे आदमी की हत्या की जिसने कर्तव्य को सदैव सर्वोपरि रखा और मजलूमो को इन्साफ दिलाने खातिर अपने प्राणों की आहुति देने से भी नहीं हिचकें। वही परिजनों को अब बिहार पुलिस परिवार और बिहार सरकार से यही उम्मीद है कि शहीद के शहादत को ससम्मान याद करते हुए उनके कातिलो को गिरफ्तार कर कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाय।

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