नेशनल हेल्थ प्रोग्राम के आंकड़े- दिल्ली में गंभीर बीमारियों की तुलना में प्रदूषण ज्यादा जानलेवा

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः नेशनल हेल्थ प्रोग्राम के आंकड़े कहते हैं कि दिल्ली में गंभीर बीमारियों की तुलना में प्रदूषण ज्यादा जानलेवा है। हर साल प्रदूषण से दूसरी बीमारियों की तुलना में ज्यादा जानें जाती हैं। स्वास्य मंत्रालय की रिपोर्ट नेशनल हेल्थ प्रोग्राम 2016 के अनुसार, दिल्ली में वर्ष 2015 में रेसपिरेटरी डिजीज से 104 मौतें हुई। करीब 3 लाख 39 हजार 506 नए मरीज दर्ज किए गए। साल 2013 में रेसपिरेटरी डिजीज ने दिल्ली में 175 लोगों की जान ली थी और 3 लाख 90 हजार 170 मरीज दर्ज किए गए थे। विशेषज्ञों का कहना है कि रेसपिरेटरी डिजीज का सबसे बड़ा कारण प्रदूषण है। यह राजधानी के लिहाज से बड़ी समस्या है। डॉक्टरों काकहना है कि प्रदूषण न केवल फेफड़ों में विकृतियां संबंधी बीमारियों के लिए जिम्मेदार है, बल्कि इससे दूसरी कई अन्य बीमारियां भी होती हैं। जिनमें कुछ संक्रमित बीमारियां जानलेवा साबित हो सकती है। वल्लभ भाई पटेल चेस्ट इंस्टीट्यूट में रेसिपिरेटरी, प्लूमनरी डिपार्टमेंट के अध्यक्ष डा. राजकुमार ने कहा कि दिल्ली में दूसरे बड़े शहरों की तुलना में पाल्यूशन लेवल हाई देखा जाता है। इससे सीओपीडी, अस्थमा, फेफड़ों की गंभीर समस्या होती है। फेफड़े सूजने या उनका आकार प्रभावित होने के मामले में दिल्ली में पेशेंट दूसरे मेट्रो शहरों से ज्यादा है। आई सेवन के निदेशक डा. संजय चौधरी ने कहा कि डेंगू मच्छरों की बात होती है कि वे साफ पानी में पनपते हैं लेकिन इसके लिए गंदगी की वजह से दूसरे जीवाणु भी पनपते हैं, जो कई बीमारियों के लिए जिम्मेदार होते हैं। प्रदूषण के कारण कार्नियां खराब होने व काला मोतिया के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। जो अंधता का सबब बन सकते हैं। पिछले वर्ष बीमारियों हुई मौतों का विवरणद नेशनल हेल्थ प्रोग्राम-2016 से प्राप्त आंकड़ों पर यदि फौरी नजर डाली जाए तो स्थिति स्पष्ट हो जाती है। द वर्ष 2013 में रेसपिरेटरी डिजीज यानी फेफड़े एवं श्वसन तंत्रिका संबधी विकृतियों से कुल 175 लोगों ने दम तोड़ा। यह आंकड़ा वर्ष 2014 के दौरान 104 दर्ज किया गया था। द इसी तरह से वर्ष 2013-14 में स्वाइन फ्लू से क्रमश: 16 व एक लोगों की मृत्यु हुई। डेंगू से इस दौरान 6 और 3 जबकि टाइफाइड से 62 व 29 व डायरिया से इस दरमियान 62 और 73 लोगों ने दम तोड़ा। इसी तरह वर्ष 2013 व 2014 में हेपेटाइटिस से सबसे ज्यादा मौते दर्ज की गई है।

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