एलजी की कमेटी को दिल्ली सरकार ने बताया अवैध

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः दिल्ली सरकार के एलजी की अनुमति के बिना लिए गए निर्णयों संबंधी फाइलों की जांच के लिए एलजी नजीब जंग द्वारा पिछले माह गठित तीन सदस्यीय कमेटी को दिल्ली सरकार ने अवैध बताया है। सरकार का कहना है कि उपराज्यपाल को इस तरह की कोई जांच कमेटी गठित करने का अधिकार नहीं है। सरकार ने कमेटी सदस्यों से सर्वोच्च न्यायालय के आदेश तक फाइलों की जांच न करने का अनुरोध किया है। दिल्ली सरकार तथा उपराज्यपाल के अधिकारों को लेकर उच्च न्यायालय का आदेश आने के बाद गत 30 अगस्त को उपराज्यपाल नजीब जंग ने देश में अपनी ईमानदारी के लिए विशेष पहचान रखने वाले अधिकारियों की एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर इस कमेटी को उन सभी फाइलों की जांच की जिम्मेदारी सौंपी थी जिन फाइलों पर सरकार ने मनमाने तरीके से निर्णय लिए थे। उपराज्यपाल ने दिल्ली सरकार के विभिन्न विभागों से 400 से अधिक फाइलें मंगाई हैं जिन्हें जांच के लिए इस कमेटी को सौंपा गया है। इस उच्चस्तरीय कमेटी में पूर्व सीएजी वीके शुंगलू, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपालास्वामी तथा पूर्व विजिलेंस कमिशनर प्रदीप कुमार को शामिल किया गया था। इस कमेटी ने अपनी जांच शुरू कर दी है। कमेटी गठित होने के लगभग एक माह बाद अब दिल्ली सरकार ने उक्त कमेटी को ही अवैध बताया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में एलजी द्वारा गठित उक्त कमेटी को अवैध बताने का निर्णय लिया गया। उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया का कहना है कि मंत्रिमंडल की राय में उपराज्यपाल को इस तरह की कमेटी गठित करने का कोई अधिकार नहीं है इसलिए यह कमेटी अवैध है। उन्होंने कहा कि चूंकि इस कमेटी में देश के तीन प्रमुख लोग शामिल हैं इसलिए उन्हें इस कमेटी से अलग हो जाना चाहिए। उपराज्यपाल व सरकार के अधिकारों को लेकर मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में है इसलिए कमेटी को सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का इंतजार करना चाहिए और जब तक अधिकारों के मामले में अंतिम निर्णय नहीं आ जाता तब तक कोई जांच नहीं करनी चाहिए।

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