सीवान के साहब का जलवा सजा देनेवाले ज़ज़ साहब का तबादला

पटना, बिहार/शिवशंकर लालः शहाबुद्दीन एक ऐसा नाम जो किसी इंट्रोडक्शन का मोहताज नहीं है।आम आदमी की कौन कहे सत्ता शीर्ष और कानून के पहरुआ भी इस एक नाम से खौफ़ के साये जीने को मजबूर हो जाते है। तभी तो सात सितंबर को पटना हाईकोर्ट ने पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया था और 9 सितंबर को सीवान कोर्ट के जज अजय कुमार श्रीवास्तव का तबादला पटना के व्यवहार न्यायालय में कर दिया गया। विश्वसनीय माध्यमो से मिली जानकारी के अनुसार शहाबुद्दीन को सात सितंबर को जमानत मिलते ही जज अजय कुमार श्रीवास्तव ने पटना हाईकोर्ट में आवेदन देकर सीवान से अन्यत्र तबादला करने का अनुरोध किया था। पटना हाईकोर्ट ने अजय कुमार श्रीवास्तव के आवेदन को गंभीरता पूर्वक लेते हुए तुंरत तबादले का आदेश निर्गत कर दिया। जानकारी के मुताबिक आवेदन में इस बात का जिक्र किया गया था कि शहाबुद्दीन के जेल से बाहर निकलने पर उनका सीवान में रहना ठीक नहीं है।अजय कुमार श्रीवास्तव का सीवान कोर्ट में अभी तीन साल भी पूरा नहीं हुआ और उनका तबादला कर दिया गया। सीवान के साहब शहाबुद्दीन को साल 2014 में चंदा बाबू के दो बेटों को तेजाब से नहला कर हत्या करने के मामले में जज अजय कुमार श्रीवास्तव ने उम्रकैद की सजा दी थी। जज के तौर पर अजय कुमार को तीन साल पहले ही सीवान कोर्ट पोस्टिंग दी गई थी।शहाबुद्दीन को सजा देने वाले जज का तबादला कर दिया गया है।सीवान कोर्ट के जज अजय कुमार श्रीवास्तव ने तेजाबकांड में शहाबुद्दीन को उम्रकैद की सजा मुकर्रर की थी। न्यायाधीश अजय कुमार श्रीवास्तव का तबादला पटना के व्यवहार न्यायालय में किया गया है। जल्द ही वे अपना पदभार संभालेंगे।हालांकि इस तबादले को रूटीन ट्रांसफर करार दिया जा रहा है।हैरानी की बात यह है कि न्यायाधीश ने खुद अपने तबादले के लिए आग्रह किया था। हालांकि जज अजय कुमार श्रीवास्तव के साथ कई अन्य जजों को भी इधर से उधर किया गया है। लेकिन अजय कुमार श्रीवास्तव के तबादले को लेकर चर्चा होना लाजिमी है।अजय कुमार श्रीवास्तव शहाबुद्दीन को 2014 में उम्र कैद की सजा सुनाए जाने के बाद चर्चा में आए थे।उनके अलावा प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी धीरज कुमार मिश्र का बेगूसराय, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी अखिलेश पांडेय का मुंगेर तथा अरविंद कुमार गुप्ता का एसडीजेएम कोर्ट में तबादला हुआ है. इनके अलावा प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी को जिले में ही अष्टम अवर न्यायाधीश बनाया गया है।

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