हिंदुओं की आस्था को सम्मान देने खातिर मुस्लिम वर्ग तोड़ रहा है ईदगाह की दीवार

गौंडा, यूपी/शिव शंकर लालः मुल्क में सौहार्द और भाईचारे को ख़त्म करने की तमाम सियासी कोशिशों को हिंदुस्तान की जरखेज मिट्टी के सपूत अक्सर ठेंगा दिखाया और दिखाते रहते है। इसी कड़ी में उत्तरप्रदेश के गोंडा जिले के नवाबगंज ब्लॉक से महज 9 किमी की दूरी पर स्थित अकबरपुर गांव के मुसलमान करीब 250 साल पुरानी ईदगाह के रखबे को छोटाकर उसकी दीवार तोड़ कर उसे हटाकर हिन्दुओं के लिए पूजा स्थल बनवाने की तैयारी कर रहे हैं। सोमवार को गांव में उस समय खुशी छा गई जब ईदगाह कमिटी की बैठक में दोनों पक्षों ने इस फैसले पर आपसी सहमति जताई। इस भाइचारे के जज्बे को देखते हुए एडीएम ने तहसील प्रशासन को जमीन की पैमाइश के निर्देश भी दे दिए है। इस बाबत बकौल ईदगाह कमिटी के अध्यक्ष अब्दुल राजिक उस्मानी ‘ईदगाह के पास एक पुराना पीपल का पेड़ है। इस पेड़ में हिन्दुओं की गहरी आस्था को देखते हुए ईदगाह हटाने का फैसला लिया गया है।’ हिन्दू तीज-त्योहारों पर यहां के लोग पीपल के पेड़ के नीचे पूजा-पाठ और भंडारे का कार्यक्रम करते है। ईदगाह की दीवार से पीपल का पेड़ सट जाने के कारण यहां आने वाले हिन्दुओं को पूजा करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अब्दुल ने कहा कि पूजा करने में दिक्कत न हो इसलिए ईदगाह की दीवार को तोड़कर 20 फीट जमीन छोड़ दी जाएगी, जिससे वे पीपल की पेड़ की परिक्रमा कर अपनी पूजा को सफल कर सकें। उन्होंने बताया कि इस काम के लिए अभी तक ईदगाह कमिटी ने डेढ़ लाख रूपए चंदा जुटाया है। जमीन की पैमाइश के बाद चंदे के पैसे से ईदगाह की दीवार तोड़कर पीपल के पेड़ से दूर नई दीवार का निर्माण कराया जाएगा। नई दीवार बन जाने के बाद पीपल के लिए चबूतरा और ब्रह्य बाबा के स्थान का निर्माण कराया जाएगा। इसके अलावा पीपल के पेड़ तक सड़क भी बनवाई जाएगी, जिसमें करीब तीन लाख रूपए की लागत का अनुमान है। अकबरपुर गांव के प्रधान अब्दुल साजिद का मानना है कि करीब दो हजार की आबादी वाले इस गांव में 50 घर मुस्लिमों के और 500 घर हिन्दू परिवारों के हैं। मगर आज तक कभी भी धार्मिक स्थल को लेकर कोई तनाव नही हुआ। दोनों समुदाय के लोग यहां पूजा और सजदा एक साथ करते हैं। प्रधान ने कहा कि सैकड़ो साल पुराने पीपल के पेड़ को हटाया नही जा सकता और भविष्य में इस जगह को लेकर कोई झगड़ा न उभरे इसलिए ईदगाह को हटाने का फैसला लिया गया है। पूर्व प्रधान राम भुआल ने कहा कि हम लोगों ने एक ऐसे प्रयास की शुरुआत की है, जिससे सबक लेकर गांवों में इस तरह के धार्मिक स्थलों के लिए हो रहे झगड़े सहमति से निपटाए जा सकते हैं। अल्पसख्यक समुदाय की इस अनूठी और बेहद सकारात्मक पहल के बाबत पुरे इलाके में चर्चा है। साथ इसकी तमाम लोगों द्वारा मुक्त कंठ से न केवल प्रशंसा की जा रही है बल्कि इससे दोनों कौम के बीच भाईचारगी और आपसी सौहार्द बढ़ाने की बेहद उम्दा मिसाल कह कर संबोधित किया जा रहा है।

Share This Post

Post Comment