लगातार बढ़ रहे है डेंगू के मरीज

देहरादून, उत्तराखंड/नगर संवाददाताः राजधानी देहरादून में डेंगू के आंतक से हाहाकार मचा है लगातार डेंगू के मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है. मगर स्वास्थ्य महकमे के अधिकारी डेंगू की रोकथाम को लेकर कितने गंभीर है. राजधानी के दून मेडिकल कॉलेज में रोजाना करीब 2500 मरीज ओपीडी में अपना डेल्थ चेकअप कराते हैं मगर इस समय डेंगू का प्रकोप चल रहा है. जिसकी वजह से मरीजों की संख्या में भारी बढ़ोत्तरी हो गई है. लैब में मेडिकल टेस्ट के लिए मरीजों की संख्या 250 से बढ़कर 900 पहुंच गई है. इस तरह से एक कर्मचारी पर करीब 250 मरीजों की मेडिकल जांच करने का बोझ है यही वजह है कि लैब में 400 मरीजों की मेडिकल जांचे लंबित रही है. गौरतलब है कि लैब में अतिरिक्त कर्मचारी नहीं तैनात किए गए है.जबकि राजधानी में 737 मरीजों को डेंगू अपना शिकार बना चुका है. अब दूसरा पहलु देखिए, मरीजों की भर्ती, इलाज और रजिस्ट्रेशन से हर महीने हॉस्पिटल को करीब 48 लाख रुपए का राजस्व मिल रहा है. जो सरकारी खजाने में जमा रहा है. बड़ा सवाल है कि आखिर इतनी मोटी रकम मरीजों से मिलने के बाद भी स्वास्थ्य अधिकारी अतिरिक्त कर्मचारी क्यों नहीं तैनात कर रहे हैं.ये हाल तब है जब सचिव स्तर के अधिकारियों के परिजन भी डेंगू की चपेट में है. दून मेडिकल कॉलेज में 30 बेड का बना वार्ड भी छोटा हो गया है. क्योंकि 27 मरीज वार्ड में भर्ती है कई भर्ती होने के लिए चक्कर काट रहे हैं अब 24 बेड का नया वार्ड बनाया जा रहा है. इस तरह से 54 बेड बढ़ जाएंगे मगर कर्मचारियों का टोटा है इलाज कैसे होगा. अब सवाल है कि जब इतने मरीज बढ़ रहे हैं तो कुछ दिनों के लिए अतिरिक्त नर्से की तैनाती क्यो नहीं की जा रही है.ऐसे में सरकार से नर्सेज का गुहार लगाना लाजिमी है कि जब 48 लाख रुपए मरीजों से ही मिल रहे हैं तो ऐसे में डेंगू के मरीजों के इलाज में अगर अतिरिक्त कर्मचारी तैनात करने पर दो या चार लाख रुपए खर्च भी हो जाते है तो क्या हर्ज है ? अगर अब भी अधिकारियों की कुंभकर्णी नींद टूट जाती तो डेंगू के महामारी का रुप लेने से पहले मरीजों का बेहतर इलाज हो जाता.

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