मिली सशर्त मिली जमानत

पटना, बिहार/शिवशंकर लालः डीएसपी यौन शोषण मामले में फसे आरा स्थित एमएमपी (घुड़सवार दस्ता) के कमांडेंट पुष्कर आनंद को उच्च न्यायालय ने बड़ी राहत दी है। अपने कनीय अधिकारी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यौन शोषण का आरोप लगाने फिर मामला दर्ज कराये जाने के बाद से तमाम तरह की फजीहत और जलालत झेल रहे कैमूर के तत्कालीन तेज–तर्रार एसपी पुष्कर आनंद को यौन प्रताड़ना के मामले में आखिरकार पटना हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत दे दी है। हालाकि अदालत ने शर्तों के साथ आरोपी आईपीएस को अग्रिम जमानत दी है।शर्त ये है कि आईपीएस को देश से बाहर जाने से पहले अदालत से अनुमति लेनी होगी। यही नहीं माननीय उच्च न्यायालय ने जमानत देने के साथ कोर्ट ने आदेश दिया है की आरोपी एसपी साक्ष्य एवम गवाहों को किसी प्रकार से अपने प्रभाव में लेने का प्रयास नहीं करेंगे। साथ ही  कोर्ट ने अपने आदेश में पुष्कर द्वारा किसी भी प्रकार की संदिग्ध कार्रवाई किए जाने पर निचली अदालत को उनका बेल बांड रद्द करने की अर्जी पर कार्रवाई करने की छूट भी प्रदान की है। न्यायमूर्ति अंजना मिश्रा की पीठ ने लंबी सुनवाई के बाद यह आदेश जारी किया। वही जमानत पर बहस के दौरान 2009 बैच के आईपीएस के वकील कन्हैया प्रसाद सिंह ने कोर्ट को बताया की भभुआ में पदस्थापित अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ) ने महिला पुलिस थाना में केस संख्या 47/14 दर्ज कराया था। अपने आवेदन में मोहतरमा ने आरोप लगाया था की एसपी ने उनसे शादी की इच्छा जाहिर कर दैहिक संबंध स्थापित किया था।इस क्रम में एसपी सरकारी आवास पर उनका आना-जाना लगा रहा करता था। बाद में पुष्कर आनंद ने शादी से इनकार कर दिया। वकील ने कोर्ट को बताया की अदालती आदेश के बावजूद सूचक यानि पीड़िता ने मेडिकल टेस्ट कराने से इनकार कर दिया।यही नहीं,जांचकर्ता को अपना मोबाइल तक नहीं दिया था। आईपीएस के वकील का बेहद तल्ख़ लहजे में कहना था कि जिले में अपराध नियंत्रण एवं कांड के पर्यवेक्षण में रुचि नहीं लेने के कारण एसपी ने एसडीपीओ पर अनुशासनिक कार्रवाई करने की अनुशंसा पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) से की थी। ठीक इसके दो दिन बाद ही एसडीपीओ ने एसपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराया था। वही दूसरी तरफ,एसडीपीओ के वकील संदीप कुमार ने कोर्ट को बताया की शादी का झांसा देकर उनकी महिला मुवल्लिक के साथ शारीरिक संबंध बनाया गया। लंबे समय तक सूचक का यौन  शोषण किया जाता रहा। जब पीड़िता से आरोपी आईपीएस का जीभर गया तो, कुंडली का मिलान नहीं होने की बात कहकर उनके द्वारा रिश्ता ख़त्म कर लिया गया। अपने तर्कों को विस्तार देते हुए वकील ने आगे दलील दी की एक आईपीएस अधिकारी की यह हरकत बलात्कार की श्रेणी में आती है।एसपी ने ऐसी हरकत अन्य महिलाओं के साथ भी की है। आईपीएस पुष्कर मनचले और शातिर इश्कबाज रहे हैं। इधर, बिहार सरकार का पक्ष रखते हुए एपीपी दिलीप कुमार सिन्हा ने कहा की सरकार ने पूरे प्रकरण की जांच सीआईडी को सौंप दी है। अहम् बात यह है की सीआईडी ने जांच लगभग पूरी कर ली है। उन्होंने कहा की दोनों अफसरों के एक दूसरे के सरकारी आवास पर आने-जाने की बात जांच में स्पष्ट रूप से पाई गई है। माननीय अदालत द्वारा तमाम दलीलों और तीनों पक्षों की दलील सुनने के बाद एसपी को तत्काल सशर्त अग्रिम जमानत दे दी। सनद रहे 09 बैच के बिहार कैडर के आइपीएस अधिकारी पुष्कर आनंद पर कैमूर में एसपी रहते हुए पुलिस उपाधीक्षक स्तर की एक महिला पुलिस अधिकारी को शादी का झांसा देकर यौन उत्पीडऩ करने का आरोप है।

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