गर्भवती बहू को कंधे पर ढोता रहा ससुर

मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश/आयोध्य प्रसाद शुक्लाः कुछ दिनों पहले ही कानपुर के हैलट अस्पताल में एक बच्चे ने इसी तरह अपने पिता के कंधे पर दम तोड़ दिया था। इसके बाद यूपी के सीएम अखिलेश यादव के निर्देश पर जिम्मेवारों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी पर अब एकबार फिर यूपी के मिर्जापुर में वहीं दृश्य सामने आया है बस पात्र बदल गए हैं। 70 वर्षीय ससुर अपनी गर्भवती बहू को कंधे पर ढोता रहा। डॉक्टर्स व नर्स से मदद की गुहार लगाता रहा पर अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद डॉक्टर्स की लापरवाही व आरामतलबी की वजह से वह अपनी बहू की जान नहीं बचा पाया।  रविवार को मिर्जापुर के जिला महिला अस्पताल में कानपुर के हैलट अस्पताल वाला दृश्य था। गर्भवती महिला के ससुर कपूर चंद पांडे का कहना है कि डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से मेरी बहू की जान चली गई। वहीं जब इस लापरवाही पर प्रभारी मुख्य चिकित्साधिकारी संजय पाण्डे से पूछा गया तो उन्होंने कहा कि डॉक्टरों की यहां 24 घंटे ड्यूटी है पर संजय पांडे ने दो टूक कहा कि वे महिला डॉक्टरों से डरते हैं, इसलिए उन्हें कुछ नहीं कहते। दरअसल रविवार को अखिलेश सरकार की 108 एम्बुलेंस ने गेरुआ गांव के निवासी अंशु पाण्डेय को जिला महिला अस्पताल पहुंचाया। गर्भवती महिला की हालत बहुत खराब थी, पर एमरजेंसी में पहुंचने के पांच घंटे तक कोई डॉक्टर देखने वहां नहीं पहुंचीं।   वहां मौजूद नर्स ने गर्भवती महिला को ड्रिप लगा दिया। 3 बजे भोर से लेकर जब सुबह 8 बजे तक इस इमरजेंसी वार्ड में कोई डॉक्टर नहीं आयीं तो बहू को तड़पता देख ससुर से रहा न गया आनन-फानन में पांडेय अपनी गर्भवती बहू को लेकर प्राइवेट डॉक्टरों के पास चले गए पर वहां भी उसकी स्थिति देख डॉक्टरों ने उसका इलाज नहीं किया और वापस जिला महिला अस्पताल भेज दिया।   जब पांडेय अपनी गर्भवती बहू को लेकर वापस जिला अस्पताल पहुंचे, तो वहां उन्हें स्ट्रेचर तक नहीं मिला। मजबूरन बहू को अपने कंधे पर उठाकर वे गाड़ी से इमरजेंसी में ले गए पर इमरजेंसी में कोई डॉक्टर नहीं था। अपनी गर्भवती बहू को कंधे पर उठाए 70 वर्षीय बुजुर्ग कपूर पांडे मिर्जापुर जिला अस्पताल में दौड़ रहे थे। डॉक्टरों से गुहार लगा रहे थे पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं था।  वहां बच्चे ने पिता के कंधे पर दम तोड़ दिया था। यहां गर्भवती बहू को कंधे पर लेकर एक ससुर अस्पताल में दौड़ रहा था। मीडिया की ओर से जानकारी दिए जाने के डेढ़ घंटे बाद डॉ शशि मिश्रा वहां आईं, पर आते ही मीडिया व परिजनों पर भड़क उठीं।   इसके बाद फिर जिला महिला अस्पताल में ऑपरेशन की प्रक्रिया शुरू की गई। परिजनों के मुताबिक तब तक बच्चा गर्भ में ही मर चुका था। डॉक्टरों ने मृत बच्चे को पेट से बाहर निकाला, लेकिन इन्फेक्शन के कारण डॉक्टरों ने महिला को वाराणसी के लिए रेफर कर दिया, जहां उसकी मौत हो गई।

Share This Post

Post Comment