शास्त्रीनगर थाना अन्तरगत सेक्स रैकेट का भंडाफोड़

पटना, बिहार/शिवशंकर लालः राजधानी में सेक्स रैकेट के एक और अड्डे का भंडाफोड़ हुआ है। इस बार पुलिस ने शास्त्रीनगर थाना अन्तरगत न्यू पुनाईचक स्थित गायत्री सदन अपार्टमेंट मे छापा मारकर सेक्स रैकेट का खुलासा किया। मौके से संचालक धिरज कुमार
को गिरफ्तार कर लिया गया है। पश्चिम बंगाल के सियालदह और कोलकाता की दो एवं मुजफ्फरपुर के बोचहां थाना झेत्र की एक युवती को जिस्मफरोशी के दलदल से मुक्त कराया गया। पुलिस ने आपत्तिजनक चीजों के साथ दो मोबाइल और बाइक भी जब्त किया है।

धीरज ने करीब एक माह पहले कुमार विश्वजीत सिन्हा का फ्लैट किराये पर लिया था। वहां मानव तस्करों के माध्यम से दूसरे राज्यों के सुदूर इलाकों से भोली-भाली लड़कियों को नौकरी दिलाने के नाम पे लाया जाता था और उनसे जिस्मफरोशी करायी जाती थी। उसकी सहयोगी भी बस स्टैंड और रेलवे स्टेशनों के आसपास से भटकती हुई लड़कियों को जाल में फसाने का काम करती थी।

करीब एक दशक से जिस्मफरोशी का गोरखधंधा कर रहे धीरज गुप्ता उर्फ शर्मा जी ने अड्डे पर छापा परते ही मामले को रफा-दफा करने के लिए पुलिस को चार लाख का आफर दे डाला। हालांकि छापा दल के पुलिसकर्मियों ने उसे सहयोगियों के साथ गिरफ्तार कर लिया।

धीरज को सेक्स रैकेट का संचालन करने के आरोप में कंकड़बाग थाने की पुलिस ने कुछ साल पहले भी गिरफ्तार किया था।लगभग एक महीने जेल में रहने के बाद वह जमानत पर छुट गया और फिर से देह व्यापार का संचालन करने लगा। बेगुसराय के मटिहानी थानान्तर्गत शिमहा की रहनेवाली उसकी सहयोगी पिछली बार पुलिस की आंख मे धूल झोंकने मे कामयाब रही थी।वह खुद को पीडि़ता बता थाने से मुक्त हो गई और बाद में धीरज को जेल से छुडा़ने के प्रयास मे जुट गई।

बुद्धा कालोनी के पंचमुखी मंदिर के समीप किराये पर रहने वाले धीरज गुप्ता ने जिस्मफरोशी से लाखों रूपये की चल-अचल सम्पत्ति बनाई है। कई रसूकजादों का उसे संरक्षण प्राप्त है। पुलिस ने उसका मोबाइल जब्त कर लिया है। बैंक खाते समेत जमीन – जायदाद का पता लगाया जा रहा है। प्रीवेंशन आफ मनी लांड्रिग एक्ट के तहत उसकी संम्पत्ती जब्त की जाएगी।

पुलिस को फ्लैट से मुक्त करायी गई तीनो लड़कियों के फर्जी निर्वाचन प्रमाणपत्र मिले है, जिनमें उनका नाम गलत लिखा है और पता बिहार के विभिन्न जिलो का अंकित है। पुछने पर धीरज ने बताया कि वह लड़कियों के फर्जी प्रमाणपत्र इसलिये बनाता था, ताकि उन्हे सिम कार्ड आसानी से मुहईया हो जाये। इससे ग्राहकों से संम्पर्क करने मे मदद मिलती थी। इसके आलावा फर्जी भोटर कार्ड किराये पर कमरा लेने के भी काम आता था।

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