इन वजहों से खास रहेगी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वियतनाम यात्रा

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्विपक्षीय वार्ता में भाग लेने के लिए वियतनाम पहुंच गए हैं. मोदी को चीन के हैंगझोउ में जी-20 की होने वाली बैठक में भी हिस्सा लेना है. मोदी ने चीन ना जाकर पहले वियतनाम का रुख किया है. वह चीन के लिए वहीं से रवाना होंगे. वियतनाम अभी चीन के साथ दक्षिण चीन सागर विवाद में उलझा हुआ है, लिहाजा ऐसे में मोदी की यह यात्रा काफी अहम है.इस यात्रा के दौरान वियतनाम की सेना को चार पेट्रोल बोट्स की सप्लाइ पर करार हो सकता है. अक्टूबर 2014 में पीएम मोदी की यात्रा के दौरान 100 मिलियन डॉलर की मदद करने की जो बात कही गई थी, यह उसका ही विस्तार होगा.कहा जा रहा है कि भारत आतंकवाद की फंडिंग पर अंकुश और काले धन के सुरक्षित ठिकानों पर कार्रवाई के लिए ठोस उपायों का मुद्दा उठाएगा. भारत का ओएनजीसी विदेश लिमिटेड तीन दशक से अधिक समय से वियतनाम में तेल निकालने की परियोजनाओं में शामिल है और द्विपक्षीय यात्रा के दौरान क्षेत्र में नई परियोजनाओं की घोषणा हो सकती है जो 15 साल के बाद हो रही है. वियतनाम की दो दिवसीय यात्रा के बाद पीएम मोदी वियतनाम से ही 3 सितंबर को हैंगझोउ के लिए रवाना होंगे जहां 4 और 5 सितंबर को वह जी-20 सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. विदेश मंत्रालय में सचिव सुजाता मेहता ने बताया का कहना है कि भारत इस मंच पर आतंकवाद के वित्तपोषण पर लगाम लगाने, टैक्स चोरी पर शिकंजा कसने और विदेश में भारतीय प्रफेशनल्स की टैक्स देनदारी को कम करने के ठोस उपायों की वकालत करेगा. सम्मेलन से इतर मोदी चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक करेंगे और ब्रिक्स के नेताओं की एक बैठक में हिस्सा लेंगे. उसके बाद मोदी सात और आठ सितंबर को लाओस जाएंगे जहां वह भारत-आसियान और भारत-पूर्वी एशिया सम्मेलन में हिस्सा लेंगे. ये दोनों सम्मेलन न सिर्फ पूर्वी एशियाई देशों के साथ भारत के आर्थिक रिश्तों को नया आयाम देंगे. ऐसा माना जा रहा है कि पेइचिंग प्रधानमंत्री के वियतनाम दौरे पर गहरी नजर रखेगा.जी20 शिखर सम्मेलन से इतर ओबामा के अन्य नेताओं के साथ मोदी से भी मिलने की संभावना है. यदि ऐसा होता है तो मोदी के मई, 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद यह दोनों नेताओं के बीच आठवीं बैठक होगी.

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