विकास यात्रा में म्यांमार के साथ है भारत

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को नए लोकतांत्रिक देश म्यांमार को आश्वासन दिया कि एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में विकसित होने की उसकी इच्छा को पूरा करने में भारत हर कदम पर उसका साथ देगा। भारत के दौरे पर आए म्यांमार के राष्ट्रपति यू हटिन क्याव के साथ द्विपक्षीय वार्ता के बाद एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में मोदी ने कहा, “आपके महान राष्ट्र ने एक नए युग में प्रवेश किया है।” गत साल नवम्बर महीने में हुए आम चुनाव में विजयी होने के बाद इस साल मार्च महीने में नोबेल पुरस्कार विजेता आंग सान सू की की पार्टी ‘नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी’ (एनएलडी) के सत्ता में आने के बाद म्यांमार के राष्ट्रपति पहली बार भारत के दौरे पर आए हैं। मोदी ने कहा कि म्यांमार की नई सरकार ने कृषि क्षेत्र में प्रगति, उद्योग और आधारभूत संरचना के विकास, शिक्षा की मजबूती, युवाओं को कुशल बनाने, नए संस्थानों की स्थापना और मौजूदा को मजबूती देने, अपने समाज की सुरक्षा, आर्थिक विकास के ठोस मार्ग पर चलने और एक आधुनिक राष्ट्र बनने की कामना के साथ यात्रा शुरू की है। उन्होंने कहा, “इस राह में हर कदम पर भारत के 125 करोड़ लोग सहभागी और मित्र के रूप में आपके साथ खड़े रहेंगे। भारत के पड़ोसियों में म्यांमार को एक खास स्थान पर रखते हुए उन्होंने कहा, “यह देश भारत और दक्षिणपूर्व एशिया को जोड़ने वाला एक भूमि सेतु है।” मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति क्याव के साथ वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने सभी द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष परस्पर सामरिक हितों और चिंताओं के प्रति संवेदनशील बने रहने पर सहमत हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दोनों देश क्षेत्र में आतंकवाद और विद्रोही गतिविधियों से निपटने के लिए एक-दूसरे को सक्रिय रूप में मदद देंगे। भारत ने सोमवार की वार्ता के दौरान ’21 वीं सदी पेंगलोंग सम्मेलन’ के तहत म्यांमार सरकार और म्यांमार के सशस्त्र जातीय संगठानों के बीच 31 अगस्त से होने वाली शांति वार्ता की पहल के लिए भी पड़ोसी देश को अपना पूरा समर्थन दिया। पहले पेंगलोंग सम्मेलन का आयोजन सू की के पिता और तत्कालीन प्रधानमंत्री आंग सान ने साल 1947 में किया था। मोदी ने कहा कि भारत और म्यांमार के बीच साझेदारी केवल अच्छे शब्दों या नीयत से पारिभाषित नहीं की गई है, बल्कि इसकी गहराई को आकार विकास के लिए साझेदारी से मिला है। दो अरब डॉलर की भारतीय सहायता पड़ोसी देश के आम लोगों के जीवन को छू रही है। वार्ता के बाद भारत और म्यांमार के बीच चार समझौतों पर भी हस्ताक्षर हुए। पहले समझौते में भारत, म्यांमार और थाईलैंड को जोड़ने वाले त्रिस्तरीय राजमार्ग के तामु-कलेवा खंड पर 69 सेतुओं का निर्माण शामिल है। दूसरे समझौते के तहत त्रिस्तरीय राजमार्ग के कलेवा- यार्गी खंड को उन्नत किया जाएगा। तीसरे और चौथे समझौते में अक्षय उर्जा तथा पारंपरिक दवा के क्षेत्र में सहयोग शामिल है। इस साल अप्रैल में म्यांमार के तामु में विद्युत आपूर्ति की शुरुआत किए जाने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि भारत अपने पूर्वी पड़ोसी देश में बिजली उत्पादन बढ़ाने को तैयार है। उन्होंने कहा, “हम गत सप्ताह म्यांमार में आए भूकंप के दौरान क्षतिग्रस्त हुए पगोडा और अन्य ऐतिहासिक स्मारकों के जीर्णोद्धार के लिए भी तैयार हैं।” राष्ट्रपति क्याव ने अपने बयान में कहा कि लोगों के समग्र सामाजिक आर्थिक विकास करने को लेकर दोनों पक्ष सहमत हैं। चार दिवसीय भारत दौरे पर आए राष्ट्रपति क्याव शनिवार को बोधगया में थे। रविवार को उन्होंने आगरा में ताजमहल का दीदार किया। मोदी के साथ बैठक से पहले विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने म्यांमार के राष्ट्रपति से मुलाकात की।

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