इंतकाम की आग में 4 को भून डाला 47 से

पटना, बिहार/शिव शंकर लालः सूबे में 5अप्रैल से जारी पूर्ण शराब बंदी के बाद एक कहावत मशहूर हो गई है” 47 लेके घूमना आसान है बिहार में शराब तो एटम बम है।” इसकी बानगी भी दिखी है कई बार मोतिहारी के सिरहा कांड में मरने वालों की संख्या शनिवार को चार हो गई। अस्पताल में इलाज के दौरान 11 साल के बच्चे ने दम तोड़ दिया। अभी भी कुछ घायलों का इलाज चल रहा है। शुक्रवार को पूर्वी चंपारण जिले के नक्सल प्रभावित पकड़ीदयाल थाना के सिरहा गांव में बाइक सवार बदमाशों ने धावा बोला।नक्सली व मछुआ समिति के नेता भिखारी साहनी के परिवार पर एके-47 से ताबड़तोड़ अंधाधुंध फायरिंग की। इस हमले में शुक्रवार को तीन लोगों की मौत हो गई। बदमाशों ने भिखारी के पड़ोसी को दस गोलियां मारी थीं। घायलों को आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान शनिवार को बच्चे की मौत हो गई। इस मामले में पुलिस ने फौरन कार्रवाई कर दो हथियारबंद बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ये वारदात किसी रंजिश की वजह से हुई। आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। ये पहला मौका नहीं है जब इस इलाके में गोलियों की तड़तड़ाहट ने खून की होली खेली है। इस का इतिहास दो दशक पहले आए चला आ रहा है। रामध्रुव प्रसाद माधुरी नाम के शख्स की सिरहा में तूती बोलती थी। रामध्रुव गुट की भिड़ंत अक्सर पूर्व मुखिया दिनेश प्रसाद कुशवाहा गुट से होती रहती थी। समय के साथ दोनों गुटों की दुश्मनी में कई बार दोनों गुटों के बंदुकाबाजो की झड़प हुई और जम कर गोलियां चलीं। मृतक भिखारी साहनी दिनेश कुशवाहा का समर्थक था। कुछ सालों पहले रामध्रुव प्रसाद माधुरी की मोतिहारी में दिनदहाड़े उस वक्त हत्या हो गई जब वो रिक्शा पर बैठकर कोर्ट से लौट रहा था। रामध्रुव की हत्या के बाद उसके बेटे जितेंद्र कुशवाहा ने कमान संभाली और फिर दिनेश कुशवाहा गुट से मोर्चा लेने लगा। कालांतर में दोनों गुटों के बीच कई बार झड़प हुई। दोनों गुटों को आखिर कर जातीय दबाव के आगे झुकना पड़ा और इसके बाद पंचायत में दोनों परिवारों के बीच सुलह हो गई। लेकिन सिरहा गाँव की कहानी यही ख़त्म नहीं हुई। आगे चलकर शुरू हुई सिरहा कोठी के जमींदार भोला सिंह की दिनेश कुशवाहा और भिखारी साहनी के बीच वर्चस्व और जमीन विवाद की लड़ाई। इलाके में एक बार भोला सिंह पर जानलेवा हमला हुआ। जिसमें जान तो बच गई, लेकिन सिर फट गया। इसके बाद भोला सिंह के बेटे राजेश सिंह की हत्या पूरे परिवार के सामने गला रेत कर की गई। इस हत्या में भिखारी साहनी का नाम आया। भिखारी साहनी अपने परिवार के साथ नैनीताल चला गया और मछली का व्यापार करने लगा। उधर, भोला सिंह ने भी सिरहा छोड़ दिया और कहीं और जाकर रहने लगा। भोला सिंह का छोटा बेटा राकेश सिंह बदले की आग में जल रहा था। भिखारी साहनी के प्रति सॉफ्ट कॉर्नर रखने वाले अपने सगे चाचा सुरेश सिंह पर राकेश सिंह ने एक दिन फायरिंग कर दी। सुरेश सिंह तो बच गया, लेकिन राकेश सिंह पुलिस के हाथों पकड़ा। पेशी के दौरान राकेश पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया।  बताते चले की राजेश की परिजनों के सामने हुई गला रेत कर नृशंस हत्या के तीन-चार आरोपी अबतक मारे जा चुके हैं। राजेश का भाई राकेश सेंट्रल जेल में बंद था। कुछ वर्ष पहले व न्यायालय में पेशी के दौरान फरार हो गया। पुलिस को राकेश द्वारा घटना कोे अंजाम दिये जाने का शक है। सूत्र बताते हैं कि राकेश का एक ही लक्ष्य था, वह अपने भाई के हत्यारों से बदला लेने का। जमींदार परिवार का मनना है कि भिखारी उसके भाई के हत्या का मुख्य सूत्रधार था।  इधर वक्त के साथ कभी साथ रहने वाले दिनेश कुशवाहा और भिखारी साहनी में भी दुश्मनी शुरू हो गई। बिहार में पंचायत चुनाव थे और दिनेश कुशवाहा के मुकाबले भिखारी साहनी चुनाव के लिए खड़ा हो गया। कई लोगों से दुश्मनी होने के चलते भिखारी साहनी पर किसने अटैक किया, पुलिस इसकी जांच कर रही है।

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