यूपी विधानसभा में बोले मुख्यमंत्री, दिल्ली जाकर संसद घेरें भाजपाई

लखनऊ, यूपी/अनिल कुमारः विधानसभा में आज प्रश्नकाल के बाद पहुंचे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने विपक्ष पर खूब भड़ास निकाली। उनके निशाने पर भाजपा और बसपा ही रहीं। उन्होंने केंद्र पर समाजवादी सरकार को कमजोर करने उत्तर प्रदेश की अनदेखी करने का आरोप लगाया। सदन में नारेबाजी कर रहे भाजपाइयों को उन्होंने दिल्ली जाकर संसद को घेरने की नसीहत दी। यह कहते हुए कि केंद्र सरकार प्रदेश के विकास के लिए धनराशि जारी नहीं कर रही है। इसके बावजूद समाजवादी सरकार अपने संसाधनों से जनता की कसौटी पर खरी उतर रही है। मुख्यमंत्री ने चुटकी ली कि ओले गिरने से प्रभावित किसानों की सहायता के लिए केंद्र से मौका मुआयना करने के लिए टीमें तो आयीं लेकिन पैसा नहीं आया। पूर्वांचल एक्सप्रेसवे के लिए भी केंद्र से मदद नहीं मिली। सदन के वेल में सरकार विरोधी नारे लगा रहे भाजपा सदस्यों को टोंकते हुए उन्होंने कहा कि वह किसानों व विकास को लेकर चर्चा में शामिल होने के लिए आये थे लेकिन भाजपा मुकाबला करने की बजाए भाग रही है। केंद्र की खामी को छिपाने के लिए हंगामा हो रहा है। उन्होंने एक पुस्तिका दिखाते हुए कहा कि उप्र ने बड़ी संख्या में सांसद जिता कर इसलिए भेजे थे कि केंद्र सरकार से मदद मिलेगी लेकिन भाजपा सियासी हठधर्मिता कर रही है। उन्होंने कहा कि 60,000 स्कूलों में बिजली पहुंचाने व आपदा प्रभावित किसानों की मदद के लिए सरकार अनुपूरक बजट लायी है।   उन्होंने प्रधानमंत्री पर हाथरस के गांव के विद्युतीकरण और बकाया गन्ना मूल्य पर गलतबयानी करने का आरोप लगाते हुए तंज कसा। अखिलेश ने बसपा को भी आड़े हाथों लिया और शुरुआत नवनियुक्त नेता विरोधी दल गयाचरन दिनकर से की। कहा कि वह नए नेता प्रतिपक्ष से बहुत उम्मीद लगा कर सदन में आये थे लेकिन निराशा ही हाथ लगी। बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा मुख्यमंत्री के उन्हें बुआ कहने पर आगरा की रैली में एतराज जताने पर अखिलेश ने इसका जवाब भी चुटीले अंदाज में दिया। कहा कि ‘वह कह रही हैं कि हमें बुआ नहीं कहें तो फिर खुद बता दें कि उन्हें बुआ नहीं तो क्या कहें। यादव ने बसपा द्वारा राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग पर भी चुटकी ली। कहा कि वह अपनी पार्टी को बचा नहीं पा रही और समाजवादी सरकार को बर्खास्त करने की मांग करते भी नहीं थक रहीं। जब से प्रदेश सरकार बनी है, तब से यही मांग कर रही हैं, जनता भी उनकी घिसी-पिटी मांग से त्रस्त हो चुकी है।

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