खण्ड-खण्ड भारत को संगठित करके रहूँगा- चाणक्य

खण्ड-खण्ड भारत को संगठित करके रहूँगा- चाणक्य

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दिल्ली/अरविंद कुमार यादवः दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान द्वारा दिव्य धाम आश्रम, दिल्ली में मासिक भंडारे का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हजाारों की संख्या में भक्त शामिल हुए। साध्वी जी ने कहा कि हे सत्य पथ के साधकों! एक साधक वही है, जो अपने साध्य को साधने की साधना में रत है। साध्य तक के इस सफर में साधक का सबसे साहसिक और विश्वसनीय साथी होता है- उसका संकल्प, जो सतत परिवर्तन है! संकल्प है, जो हर अवरोध में भी राह है! हर विरोध में भी उत्साह है एक बीज जब अंकुरित होने का संकल्प धारण करता है, तो धरती की कठोरता नहीं देखता, आँधियों के वेग नहीं देखता, सूरज के बरसते अंगारे नहीं देखता! वह तो बस सतत संघर्ष कर, अपना सर्वस्व न्यौछावर कर, धरती का वक्ष चीर कर, सिर उठाकर बढ़ना जानता है! स्वामी विवेकानंद कहा करते थे- ‘हे साधकों! एक लक्ष्य निर्धारित करो और फिर उस लक्ष्य को अपना जीवन बना लो! उसी को सोचो! उसी के सपने लो! उसके अलावा अन्य कोई विचार तुम्हें स्पर्श तक न करे। यही संकल्प की राह है।’ इसी संकल्प की राह से गुजरकर महान युगों और युगपुरूषों का गठन हुआ। गौतम ने बोधि वृक्ष के नीचे संकल्प धारण किया था- ‘चाहे मेरी अस्थियाँ सूख जाएँ, रगों में रक्त की एक बूँद शेष न बचे- पर मैं डटा रहूँगा!’ इसीलिए समाज को निर्वाण प्राप्त महात्मा बुद्ध मिले। संस्कृति पुरूष चाणक्य ने संकल्प लिया था- ‘खण्ड-खण्ड भारत को संगठित करके रहूँगा।’ इसी संकल्प की ताल पर अखण्ड भारत का सपना पूरा हुआ। स्वामी विवेकानंद ने संकल्प धरा था कि मैं माँ भारती की सांस्कृतिक खुशबू को विश्व के प्रांगण में महकाउँगा। यही हुआ! पाश्चात्य सभ्यता पर बड़ी शान से हमारी सांस्कृतिक विजय पताका लहरा उठी! हे साध्कों! आज यही संकल्प वर्तमान युग की पुकार है। गुरुदेव श्री आशुतोष महाराज जी ने जो विश्व शांति का लक्ष्य स्थापित किया है। हम भी अपने-अपने संकल्प बाणों द्वारा इस लक्ष्य का भेदन कर सकते हैं। याद रहे, कोई भय, कोई आलस्य, कोई नकारात्मकता, कोई विरोध हमारे इस बाण-संधन को भंग न कर सके। हमारा संकल्प-बाण सारे विश्व में स्वस्थ और शांत वातावरण का निर्माण करना किसी भी परिस्थिति में न चुके।
सांस का हर सुमन है वतन के लिये,
जिन्दगी ही हवन है वतन के लिये,
कह गई फांसियों में फंसी गर्दनें,
यह हमारा नमन है वतन के लिये।

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