अस्पताल के मुर्दाघर से चोरी हुआ शव

भोपाल, मध्यप्रदेश/नगर संवाददाताः मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल के शव परीक्षण कक्ष से गायब हुए नाबलिग लड़के का शव गुरुवार को एक सामाजिक संस्था को सौंपे जाने का खुलासा हुआ है. बताया जा रहा है कि शव को लावारिस मानकर सामाजिक संस्थान ने दफना दिया था. राजधानी के एमपी नगर की एक दुकान में 29 जुलाई को करंट लगने से एक लड़के की मौत हो गई थी. पुलिस का मानना था कि, मृतक चोरी करने के इरादे से दुकान में घुसा था. तीन दिन तक शव की पहचान नहीं होने पर पुलिस ने शव को सुरक्षित रखवा दिया था. बताया जा रहा है कि इस शव को एक सामाजिक संस्था सौंप दिया था, जिसने भदभदा श्मशान घाट पर शव को दफना दिया था. अब पुलिस खुदाई कर शव को निकाल रही है, जिससे बाद शव को परिजनों को सौप दिया जाएगा. एमपी नगर पुलिस ने बुधवार को मृतक के परिजनों को खोज निकाला था. कपड़े और हुलिए के आधार पर उन्होंने मृतक की पहचान इमरान के रूप में की थी. इसके बाद परिजन शव लेने के लिए हमीदिया अस्पताल पहुंचे, उस वक्त शव के गायब होने का खुलासा हुआ था.परिजनों के हंगामा करने पर कोहेफिजा थाने से पुलिस बल मौके पर पहुंचा था. परिजनों ने डॉक्टरों पर बेटे के शव को बेचने का आरोप लगाया था. इस हंगामे के करीब 24 घंटे बाद पुलिस और अस्पताल प्रबंधन ने शव को ढूंढ निकाला है. राजीव नगर में रहने वाले रशीद खान के परिवार वालों ने सोशल मीडिया में करंट लगने से मौत होने वाले व्यक्ति की तस्वीर देखी तो उन्हें पता लगा कि यह उनका बेटा इमरान (18) है. वे बुधवार को पुलिस के साथ हमीदिया अस्पताल के मुर्दाघर पहुंचे जहां उन्हें बताया गया कि शव तो कोई और ही ले जा चुका है. भोपाल दक्षिण के पुलिस अधीक्षक अंशुमान सिंह ने संवाददाताओं से कहा है कि अज्ञात व्यक्ति का शव मुर्दाघर के फ्रीजर में सुरक्षित रखा गया था. इस तरह के शव पुलिस की मौजूदगी में परिजनों को सौंपे जाते है. इसमें हमीदिया अस्पताल के मेडिको लीगल इंस्टीट्यूट की लापरवाही मानी जा रही है. मेडिको लीगल इंस्टीट्यूट के निदेशक डॉ. अशोक शर्मा ने माना है कि पुलिस ने शव को मुर्दाघर में सुरक्षित रखने को कहा था लेकिन कुछ लोग आए तो यह मान लिया गया कि शिनाख्त हो गई है और उन्हें शव सौंप दिया गया.

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