संघठन में भी भारी फेरबदल

गोंडा, युपी/मयुर रैतानीः समाजवादी पार्टी आने वाले दिनों में विधानसभा चुनाव के लिए अपने घोषित प्रत्याशियों में बड़ा बदलाव करने जा रही है पार्टी अपने मौजूदा विधायको के टिकट काटने की योजना बना रही है ।सपा 72 मौजूदा विधायको का टिकेट काटेगी वही घोषित उम्मीदवारों के नामो में भी फेरबदल के साथ संघठन में भी बदलाव करने वाली है कुछ जिलों में संगठन में फेरबदल की भी संभावना है। इसके लिए सपा के मंडल प्रभारियों की रिपोर्ट को आधार बनाया जाएगा। अधिकतर प्रभारियों ने पार्टी नेतृत्व को रिपोर्ट सौंप दी है। प्रभारियों ने कई उम्मीदवारों की सक्रियता और कुछ जिलों में संगठन के कामकाज पर सवाल उठाए हैं।सपा ने दो विधान परिषद सदस्यों को एक-एक मंडल का प्रभारी बनाया है। इस तरह 36 एमएलसी 18 मंडलों के प्रभारी बनाए गए हैं। इन सभी को 15 दिन में जिला संगठन, उम्मीदवारों और विधायकों की परफॉरमेंस के बारे में रिपोर्ट देने को कहा गया था। अधिकतर प्रभारी ईद के बाद जिलों में गए। उन्होंने पार्टी पदाधिकारियों, विधायकों, नेताओं व अन्य सूत्रों से फीडबैक लिया। इसी के आधार उन्होंने अपनी रिपोर्ट सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव या महासचिव प्रो. रामगोपाल यादव को सौंप दी है। एक-दो प्रभारी बचे हैं, जिनकी रिपोर्ट मिलना शेष है। प्रभारियों की रिपोर्ट का विश्लेषण करने के बाद पार्टी नेतृत्व घोषित उम्मीदवारों, मौजूदा विधायकों के टिकट और संगठन में फेरबदल पर फैसला करेगा। प्रभारियों को कई मौजूदा विधायकों के खिलाफ नाराजगी की शिकायतें मिली हैं। कहीं वे गुटबंदी में शामिल हैं तो कहीं कार्यकर्ताओं की अनदेखी के आरोप हैं। कुछ विधायकों के खिलाफ क्षेत्र में ज्यादा सक्रिय न रहने और विकास कार्यों पर पर्याप्त ध्यान न देने के आरोप हैं। हालांकि कुछ विधायकों की परफॉरमेंस अच्छी भी आंकी गई है। उनके विकास कार्यों की सराहना हुई है। माना जा रहा है कि मौजूदा विधायकों के टिकटों में विधानमंडल के प्रस्तावित सत्र में अनुपूरक बजट पास करने के बाद ही विचार किया जाएगा। यदि मंडल प्रभारियों के फीडबैक को आधार माना गया तो एक तिहाई घोषित उम्मीदवारों के टिकट कट सकते हैं। ये ऐसे प्रत्याशी हैं जिनकी क्षेत्र और पार्टी में स्वीकार्यता और सक्रियता अपेक्षा से कम है। उनके चुनाव जीतने की संभावना कम मानी जा रही है।कुछ जिलों में सामाजिक, जातिगत गणित को ध्यान में रखकर प्रत्याशी घोषित न होने की शिकायतें हैं। सपा ने 2012 में हारी हुई ज्यादातर सीटों पर प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। केवल 11 टिकट घोषित होने बाकी हैं। ऐसी संभावना है कि घोषित उम्मीद वारों में 50-60 के टिकट कट जाएंगे। सपा के कई जिलाध्यक्षों की छुट्टी भी हो सकती है। इनके जिलों में पार्टी खेमों में बंटी हुई है। कई जिलाध्यक्ष खुद गुटबंदी में शामिल हैं। कहीं वे मंत्री के खेमे में हैं तो कहीं विधायकों के साथ।चुनाव के समय निष्पक्ष छवि वाले जिलाध्यक्षों की जरूरत को देखते हुए कई जिलों में संगठन में फेरबदल हो सकता है।

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