बरौनी में फिर से शुरू होगा यूरिया का उत्पादन, मोदी सरकार ने दी मंजूरी

बेगूसराय, बिहार/नगर संवाददाताः सरकार ने बुधवार को गोरखपुर, सिन्द्री और बरौनी की तीन बंद यूरिया संयंत्रों के पुनरोद्धार प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. इस पर 18,000 करोड़ रपये की लागत आने का अनुमान है. सरकार का इसके पीछे मकसद पूर्वी राज्यों की मांग को पूरा करने तथा यूरिया उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाना है. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता वाले केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने तीन बंद उर्वरक इकाइयों के पुनरोद्धार को मंजूरी प्रदान की जिसमें प्रत्येक की क्षमता 12.7 लाख टन प्रतिवर्ष की है. फर्टिाइजर कापरेरेशन इंडिया लिमिटेड (एफसीआईएल) की सिन्द्री (झारखंड) और गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) के यूरिया संयंत्र बंद हैं जबकि हिन्दुस्तान फर्टिलाइजर्स कापरेरेशन लिमिटेड (एचएफसीएल) की बरौनी (बिहार) के यूरिया कारखाने में भी उत्पादन ठप है. एक सरकारी विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘इन तीन उर्वरक इकाइयों का विशेष उद्देशीय निकाय (एसपीवी) के जरिये पुनरद्धार किया जायेगा. ये निकाय सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के होंगे और इन्हें नामांकन के जरिये बनाया जायेगा. इन सार्वजनिक उपक्रमों में एनटीपीसी, कोल इंडिया, इंडियन ऑयल कापरेरेशन और एफसीआईएल अथवा एचएफसीएल शामिल हैं. विधि और आईटी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘आज का यह फैसला पूर्वी भारत की अर्थव्यवस्था के लिये पास पलटने वाला होगा.’’

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