बीजापुर में उफनती नदी में बहे तीन लोगों का नहीं लगा सुराग

बीजापुर, छत्तीसगढ़/नगर संवाददाताः छत्तीसगढ़ के नेलशनार थाना छेत्र के नेलगुडा घाट में इंद्रावती नदी पार करते समय नदी में बही महिला समेत मासूम का अब तक कोई सुराग नहीं चला है. बस्तर की जीवनदायिनी इंद्रावती नदी मानसून के सत्र में नदी पार माड़ क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों के लिए एक अभिशाप के रूप में आन खड़े होती है. इन दिनों नदी पार के सैकड़ों गांव इंद्रावती के तेज प्रवाह के कारण टापू में तब्दील हो जाते हैं. मानसून सत्र के चार माह तक इस माड़ क्षेत्र में किसी भी प्रकार की शासकीय योजनाएं नहीं पहुंच पाती और यहां के रहवासी अपने मूलभूत आवश्यकताओं से भी मोहताज रहते हैं. स्वास्थ्य, शिक्षा, भूख, प्यास का दर्द ही इन चार माहों में क्षेत्रवासियों के नसीब में रहता है. अपनी मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए इन क्षेत्रों के ग्रामीण भारी जोखिम के बाद भी डोंगी के सहारे इंद्रावती नदी को पार करने की कोशिश करते हैं, जिससे उनके बच्चों को रसद और स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें. बीते दिनों इंद्रावती नदी पार के पल्लेवाया और नीराम गांव से 11 ग्रामीण रसद लेने तुमनार साप्ताहिक बाजार में पहुंचने के लिए डोंगी के सहारे उफनती नदी को पार करने का जोखिम लिया. नदी का बहाव इतना तेज था कि कुछ ही मीटर तक डोंगी पहुंच पाई और नदी के प्रवाह को न झेल पाने की वजह से पलट गई. नाव पलटने के बाद सभी ग्रामीण नदी के बाहव के साथ बहने लगे. इसी में लालू राम कोरसा नामक युवक ने अपनी सूझबूझ व हिम्मत का परिचय देते हुए पलटी हुई डोंगी को काफी मशक्कत के बाद सीधा किया और डूब रहे 11 ग्रामीणों में से नौ ग्रामीणों को बचाकर नदी किनारे लाया, लेकिन अफसोस कि लालू ने भारी जोखिम लेने के बाद भी एक बच्ची व एक महिला को बचा पाने में असफल रहा. दंतेवाड़ा जिला प्रशासन ने लालू राम कोरसा के बहादुरी को देखते हुए और मीडिया के पहल पर आने वाले 15 अगस्त को बहादुर युवक को सम्मानित करने की बात की एवं राज्यस्तरीय सम्मान दिलवाने का प्रयास की बात की है.

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