यूआईटी ने रोडवेज बस स्टेण्ड में अवैध के साथ-साथ वैध निर्माण भी तोड़ा

उदयपुर, राजस्थान/नगर संवाददाताः नगर विकास प्रन्यास ने शहर में रोड़ नेटवर्क के लिए शुक्रवार अलसुबह एक और बड़ी कार्यवाही करते हुए रोड़वेज बस स्टेंड पर अवैध अतिक्रमण को ध्वस्त करने के साथ-साथ वैध निर्माण को भी ध्वस्त कर दिया। रोड़ नेटवर्क में आ रहे कर्मचारी संगठनों के बरसों पुराने कार्यालय को भी जमींदोज कर दिया, वहीं पिछली सरकार में शुरू हुई ग्रामीण बस सेवा के कार्यालय को भी धराशायी कर दिया, जबकि इस कार्यालय को निगम द्वारा स्वीकृति दे रखी थी । कार्यवाही के दौरान निगम के अधिकारी कुछ नहीं बोले, परन्तु अधिकारियों में आक्रोश व्याप्त है। नगर विकास प्रन्यास का अतिक्रमण निरोधी दस्ता जिला प्रशासन एवं भारी पुलिस बल के साथ शुक्रवार अलसुबह 5 बजे उदियापोल स्थित केंद्रीय बस अड्डे पहुंचा जहां पर सबसे पहले हनुमान मंदिर की आड़ में किए गए अवैध निर्माण को चार जेसीबी की मदद से ध्वस्त करने की कार्यवाही शुरू की गई। मंदिर के आगे बनी प्याऊ को भी ध्वस्त कर दिया। इसके बाद मंदिर के इर्द-गिर्द तीन कोटडिय़ां भी बना रखी थी यहां तक कि एक अंडरग्राऊंड कमरा बना रखा था जिसमें बैठ कर नशेड़ी नशा करते थे। इन सभी निर्माण को जेसीबी की मदद से सुबह 9 बजे तक पूरी तरह मंदिर को सुरक्षित रखते हुए ध्वस्त कर दिया और मंदिर का पूरा क्षेत्र खोल दिया। बस स्टेंड की बावड़ी पर शम्भूनाथ महाराज की समाधि को भी ध्वस्त कर दिया गया। बताया गया है कि इस मंदिर का पुजारी विकलांग होकर परसाद के तनेश्वर महादेव मंदिर का भी पुजारी है वह महिने में चार-पांच बार आता है और जितना चढ़ावा आता है, बटौर कर ले जाता है। इस मंदिर में हमेशा पूजा-अर्चना उनका चेला गोपाल भारती करता आ रहा है। इसके बाद यूआईटी दस्ते ने बस स्टेंड के सहारे-सहारे प्रस्तावित सड़क पर बनी तीन कोटडिय़ों को भी ध्वस्त कर दिया। इसके बाद सबसे बड़ी कार्यवाही बरसों पुराने कर्मचारी भवन पर शुरू की गई। अलसुबह पौने पांच बजे न्यास सचिव रामनिवास मेहता के नेतृत्व में विशेषाधिकारी पुष्पेंद्र सिंह शेखावत, भूमि अवाप्ति अधिकारी गोविंद सिंह देवड़ा, अधीक्षण अभियन्ता रेशमाराम हुड़ा, अधिशाषी अभियन्ता अनित माथुर व महेश हाड़ा, तहसीलदार गोवर्धन सिंह झाला, पटवारी चिरंतन शर्मा, भरत हताया, राजेश मेहता, सुमित राजपाल, नरेश मोरवानिया, रेणु पानेरी, अमीन, छोटेलाल मीणा व बुद्धाराम राजपूत, स्थानीय पार्षद राकेश पोरवाल के साथ चार जेसीबी व एक फोकलेन के अलावा होमगार्ड के जाब्ते के साथ यूआईटी से रवाना हुए और पांच बजे बस स्टेंड पहुंचे जहां पर कार्यवाही शुरू की। कार्यवाही के दौरान अतिरिक्त जिला कलेक्टर शहर ओ.पी. बुनकर, पुलिस उप अधीक्षक भगवत सिंह हिंगड़ के अलावा भारी पुलिस बल मौजूद था। राजस्थान ग्रामीण परिवहन बस सेवा को तत्कालीन कांगे्रस सरकार ने अक्टूबर 2012 में पूरे प्रदेश में प्रारम्भ किया था। उदयपुर में तत्कालीन परिवहन मंत्री विरेंद्र बेनीवाल ने इस सेवा का केंद्रीय बस स्टेंड पर शुभारम्भ करते हुए बस स्टेंड के सामने बनाए गए कार्यालय का भी शुभारम्भ किया था, लेकिन शुक्रवार को यूआईटी दस्ते ने एमओयू के तहत कर्मचारी भवन को गिराया गया। इसके बाद कलेक्टर ने देखा कि स्मार्ट सिटी में राजस्थान ग्रामीण परिवहन बस सेवा केंद्र का जो कार्यालय है वह गलत बना हुआ है उन्होंने उस पर भी कार्यवाही के न्यास सचिव को निर्देश दिए। इस पर तीन बजे करीब अचानक यूआईटी का अतिक्रमण दस्ता उस कार्यालय के बाहर पहुंच गया और कर्मचारियों को तुरन्त प्रभाव से कार्यालय खाली करने के आदेश दिए। इस पर वहां मौजूद कर्मचारियों एवं ग्रामीण परिवहन बस सेवा संचालक द्वारा कार्यालय खाली कराया गया और देखते ही देखते जेसीबी ने उक्त कार्यालय को मलबे में तब्दील कर दिया। राजस्थान ग्रामीण परिवहन बस सेवा के संचालक आनंद ट्रांसपोर्ट के मालिक चंद्रप्रकाश चोर्डिया का आरोप है कि परिवहन निगम द्वारा किए गए एमओयू में उक्त कार्यालय दिया गया और बिना सूचना के प्रशासन व यूआईटी ने हठधर्मिता दिखाते हुए कार्यालय को ध्वस्त कर दिया। इस संबंध में परिवहन निगम के चीफ मैनेजर दीपेश नागर से बातचीत की तो वे भी कोई जवाब देने में समर्थ नजर नहीं आए। नगर विकास प्रन्यास ने मुख्य सचिव की मौजूदगी में राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के साथ इकरार किया था कि प्रस्तावित 60 फीट चौड़ी सड़क पर परिवहन निगम के कर्मचारी संगठनों का जो दो मंजिला कार्यालय है उसको ध्वस्त कर यूआईटी नया कर्मचारी भवन बनाकर देगी, इसी एमओयू के तहत यूआईटी ने इसे ध्वस्त किया। इसकी मोटी-मोटी दीवारें और बरसों पुराना पक्का निर्माण को तोडऩे में सबसे ज्यादा समय लगा। तीन बजे तक पूरे कार्यालय को ध्वस्त कर समतलीकरण कर दिया। यूआईटी अब आज जो मंदिर के इर्द-गिर्द से जो अवैध अतिक्रमण हटाए वहां पर नया कर्मचारी भवन बनाकर परिवहन निगम को सौंपेगा। यूआईटी द्वारा शुक्रवार को अचानक रोडवेज बस स्टेंड पर कार्यवाही प्रारम्भ की, ये सभी अधिकारियों का पूर्व सुनियोजित प्लान था। कार्यवाही के दौरान जिला कलेक्टर रोहित गुप्ता ने मौके पर आकर निरीक्षण किया और देखा कि मंदिर के इर्द-गिर्द जो अवैध निर्माण है वहां पर अवैध गतिविधियां भी हो रही थी। नशेड़ी पांच फीट गहरे बने तहखाने में बैठ कर नशा करते थे उन सभी के साथ-साथ पीछे के हिस्से को भी ध्वस्त करने के भी निर्देश दिए। साथ ही उन्होंने आगे की तरफ दौरा किया तब उन्होंने बस स्टेंड के सामने खुले मैदान में बने ग्रामीण परिवहन बस सेवा केंद्र को भी तोडऩे के निर्देश दिए थे। कलेक्टर व न्यास अध्यक्ष द्वारा कार्यवाही के दौरान रोडवेज बस स्टेंड का निरीक्षण किया तब उन्होंने भी बस स्टेंड के प्रवेश के दौरान देखा कि बाहर अवैध रूप से केबिन लगा रखे है या परिवहन निगम ने जमीनें आवंटित की हुई है। इस पर तो कलेक्टर की नजर जाने के बाद भी उन्हें हटाने को लेकर कोई कार्यवाही नहीं की जो कि स्मार्ट सिटी में एक दाग है। इससे पूर्व 1992 में तत्कालीन अतिरिक्त जिला कलेक्टर (शहर) सी.एस. बेनीवाल एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक बी.आर. ग्वाला ने उदियापोल पर सारे अतिक्रमण को ध्वस्त किया था। एक बार पुन: बस स्टेंड अब अतिक्रमण के जाल में उलझता जा रहा है। नगर विकास प्रन्यास द्वारा रोड़ नेटवर्क को मास्टर प्लान के अनुरूप बनाने को लेकर की जा रही कार्यवाही में एक और बड़ा कदम उठाया। कुम्हारों के भट्टे से एग्रीकल्चर कॉलेज के बीच से बस स्टेंड के किनारे-किनारे होते हुए रेलवे पुलिया के वहां 60 फीट चौड़ी सड़क का निर्माण कराना प्रस्तावित है। इसी सड़क को लेकर लम्बे समय से जो बाधाएं आ रही थी उन्हें न्यास धीरे-धीरे दूर कर इस सड़क का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

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