ठंड से पंगा…… ना बाबा ना

सभी प्राकतिक प्रक्रियाएं आपके शारीरिक क्रियाकलापों से जुडी हुई हैं। ठंड होने पर उसका महसूस होना भी इसी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में यदि आप महज बहादुरी दिखाने के चक्कर में ये जताते हों कि ‘ये ठंड किस चिडिया का नाम हैं ‘,तो संभल जाइए। ये बिना-वजह की बहादुरी आपके लिए मुसीबत बन सकती है। कुछ लोग अक्सर सर्दी को लेकर लापरवाही दिखाना चाहते हैं। दरअसल वे दूसरे लोगों पर यह इम्प्रेशन डालने की कोशिश मे रहते हें कि जैसे उन्हें सर्दी लग ही न रही हो।

क्योंकि पता नहीं कब,क्यों और कैसे ज्यादातर लोगो के मन में यह धारणा बैठ गई है कि जिसको सर्दी लगती है वह कमजोर होता है और जिसे सर्दी नहीं लगती वह ताकतवर होता है। जबकि इसका हकीकत से कुछ लेना देना नही है। सर्दी और गर्मी ये न सिर्फ अहसास हैं बल्कि शरीर के दुशमन हैं।दरअसल सर्दी और गर्मी अचानक शरीर के दुशमन हैं।दरअसल सर्दी और गर्मी अचानक शरीर को उस तापमान में ले जाते हैं जिसका वह आदी नही होता। नतीजतन लोग बीमार पड जाते हैं।
फिलहाल ऐसा कोई तर्क मेडिकल साइंस के पास नही है कि सर्दी कम कम लगना बहादुरी या ताकतवर होने की निशानी हो।पर युवा खासकर लडके इसे अपनी मर्दांनगी से जोड लेते है और वे सर्दियों मे भी कम से कम कपडे पहनाना चाहते हैं। टोपी लगाना तो लडकों के लिए लगभग शर्म का विषय बन गया है। बहुत उंचाई वाले पहाडी इलाकों को छोडकर मैदानी इलाकों खासकर महानगरों और दूसरे शहरों में लडके सर्दियों से बचने के लिए टोपी बहुत कम लगाते हैं।
लडकिंया हालांकि सर्दी न लगने को औरत अपने से नही जोडती मगर उन्हें लगता है कि अगर ज्यादा कपडे पहन लिए या मोटी उनी कपडों से शरीर ढंकें। अगर अपने शरीर को ढंक लिया तो वे भददी दिखेगीं। उन्हें अपने सुंदर दिखने की इस कदर चिंता होती है कि दिसंबर और जनवरी महीने में भी तमाम युवतियां शादियों मे बिना स्वेटरों के दिखती हैं। जबकि सर्दी में सर्दी से बचने के लिए एहतियात रखना ही चाहिए।
सर्दी सभी उम्र के लोगो पर अपना दुष्प्रभाव छोडती है। इससे शरीर की पाचन शक्ति पर असर पडता है और स्वास्थ्य गिरने लगता है। इसलिए सर्दियों में ठंड से खुद को बचाएं। जब ज्यादा ठंड पड रही हो तब खासकर तब,जब शीतलहर चल रही हो, तो बहुत जरूरी न होने पर धर से बाहर न जाएं। इस मौसम मे जब बाहर निकले तो शरीर पूरी तरह से ढंक लें। अगर बाइक चलाना हो तो विंडचीटर के साथ अपने सिर को गर्म ऊनी टोपी से जरूर ढंक लें।ज्यादा देर तक खुली हवा और खुले आसमान में न रहें। कपडों के नीचे वुलन इनर का इस्तेमाल करें तथा ग्लब्स का इस्तेमाल करें साथ ही स्कार्फ पहनना भी न भूलें।
कुछ लोग सर्दी से बचाव का शार्टकट ढूंढतें है। और साथ ही मौसम का बहाना बनाकर शराब पीते हैं। शराब पीने से सर्दी जाती नही है बल्कि विशेष लगती है। डॉक्टरों का
मानना है कि शराब पीना सर्दी को दावत देना है। सच बात तो यह है कि सर्दी के दिनों में ठंड से मरने वालो लोगो में से एक प्रतिशत उन लोगों का भी होता है, जिन्हें शराब पीने के बाद सर्दी लग जाती है।

Share This Post

Post Comment