एमवाय अस्पताल में एनिस्थीसिया से दो बच्चों की मौत

इदौर, मध्य प्रदेश/नगर संवाददाताः मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर के शासकीय महाराजा यशवंतराव चिकित्सालय (एमवायएच) में ऑक्सीजन की जगह एनिस्थीसिया के लिये इस्तेमाल की जाने वाली नाइट्रस ऑक्साइड गैस दिये जाने से दो मासूम बच्चों की मौत के बहुचर्चित मामले की जांच के लिये तीन सदस्यीय समिति का गठन किया. उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन और न्यायमूर्ति विवेक रूसिया ने इस मामले को लेकर दायर तीन जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जांच समिति के गठन का आदेश दिया. इस समिति में किसी सेवानिवृत्त जिला जज, केंद्र सरकार के स्वास्थ्य विभाग के एक प्रतिनिधि और भोपाल के शासकीय मेडिकल कॉलेज के डीन को शामिल किया जायेगा. याचिकाकर्ताओं में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता प्रमोद द्विवेदी के वकील मनीष यादव ने संवाददाताओं को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि अदालत ने इस समिति को दो महीने के भीतर मामले की जांच पूरी कर रिपोर्ट पेश करने को कहा है. उच्च न्यायालय में दायर तीन जनहित याचिकाओं के जरिये एमवायएच में कथित तौर पर लापरवाही के चलते दो बच्चों की मौत की ओर अदालत का ध्यान खींचा गया है. याचिकाकर्ताओं ने गुहार की है कि दोनों बच्चों के परिजनों को प्रदेश सरकार से उचित मुआवजा दिलाया जाये और इस मामले में जानलेवा लापरवाही के लिये जिम्मेदार स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया जाये. एमवायएच के ऑपरेशन थियेटर में जिस पाइप से ऑक्सीजन आनी चाहिये, उससे कथित तौर पर नाइट्रस ऑक्साइड की आपूर्ति की जा रही थी. इस गंभीर गड़बड़ी से आयुष (05) और राजवीर (01) की 27 से 29 मई के बीच अलग-अलग ऑपरेशन के दौरान मौत हो गयी थी. इस ऑपरेशन थियेटर का 24 मई को ही लोकार्पण किया गया था.

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