दिल्ली सरकार की बढ़ेगी मुसीबते

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः लाभ का पद मामले में फंसे दिल्ली सरकार में 21 संसदीय सचिवों सहित 27 रोगी कल्याण समिति के अध्यक्ष पर लटकी सदस्यता रद्द होने की तलवार के बाद आप सरकार का संकट बढ़ गया है। यदि ये विधायक यह साबित नहीं कर पाए कि वे लाभ के पद लाभ का पद नहीं है तो इनकी सदस्यता रद्द हो सकती है। सदस्यता रद्द होने के बाद आप विधायकों की संख्या 67 से घटकर 23-26 रह जाएगी। इस संबंध में सरकार का कहना है कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने 14 जुलाई तक संसदीय सचिव को अपना पक्ष रखने का समय दिया है। यह विधायक चुनाव आयोग के समक्ष साबित कर देंगे कि वह लाभ के पद पर नहीं बैठे हैं। वहीं रोगी कल्याण समिति पर अभी कोई नोटिस नहीं है। हमें उम्मीद है कि संसदीय सचिवों की बात को चुनाव आयोग सुनेगा व समझेगा। उनका कहना है कि केंद्र दिल्ली सरकार के हर काम पर रोड़ा अटका रहे हैं। अब मोदी जी हमारे 21 विधायकों की सदस्यता के पीछे पड़ गए हैं और देश में झूठ का प्रचार कर रहे हैं। यह संसदीय सचिव निशुल्क जनता की सेवा कर रहे हैं। इसी तरह रोग कल्याण समिति के अध्यक्ष स्वास्थ्य सुधार की दिशा में काम कर रहे हैं।  दिल्ली में महज 21 आप विधायकों पर ही सदस्यता रद्द होने का खतरा नहीं मंडरा रहा, बल्कि यह आकड़ा करीब 42 तक का हो सकता है। सूत्रों की माने तो 21 संसदीय सचिव के अलावा 27 विधायकों को रोगी कल्याण समिति का सदस्य भी बनाया गया है। यह भी लाभ के पद पर है। साथ ही दिल्ली वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष का पद भी इस दायरे में आता है। विपक्ष इस दिशा में कानूनी सलाह ले रहा है। विरोधी नेताओं की माने तो कांग्रेस के कार्यकाल में भी सीलमपुर से पूर्व विधायक चौधरी मतीन अहमद को इस पद से इस्तीफा देना पड़ा था। जब कांग्रेसी नेता को लाभ के पद के डर के कारण वफ्फ बोर्ड के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना पड़ सकता है तो आप नेताओं पर भी वहीं कानून लागू होता हैं। बावजूद इसके ओखला से आप विधायक इस पद पर बने हुए हैं। वहीं अन्य का कहना है कि फर्जी डिग्री में फंसे आप विधायक जितेंद्र सिंह तोमर की सदस्यता भी खतरे में है।

 

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