शिक्षकों को मिला अजीब फरमान, खुले में शौच करने वालों का मोबाइल से खींचना होगा फोटो

सतना, मध्य प्रदेश/नगर संवाददाताः एमपी के सतना जिले में शिक्षकों को एक अजीब फरमान जारी किया गया है. ब्लॉक शिक्षा अधिकारी ने आदेश दिया है कि अब शिक्षकों को अपने क्षेत्र में खुले में शौच करने वालों को समझाइश देनी होगी. फिर भी यदि कोई नहीं मानता है तो उसकी फोटो खींचकर उन्हें पंचनामा बनाकर भेजना होगा. जानकारी के मुताबिक, एसडीएम के निर्देश पर जिले के उचेहरा ब्लॉक के बीईओ आरपी मिश्रा ने यह आदेश 25 जून से लागू कर दिया है. आदेश में कहा गया है कि शिक्षकों को उन क्षेत्रों को चिन्हित करना होगा, जहां ग्रामीण खुले में शौच के लिए जाते हैं. इसके बाद सुबह 5 बजे से 7 बजे तक और शाम को 7 बजे से 8 बजे तक उन क्षेत्रों की निगरानी करनी होगी. साथ ही लोगों के घर जाकर उन्हें खुले में शौच न करने के लिए समझाइश भी देनी होगी. फिर भी यदि कोई व्यक्ति खुले में शौच करता पाया जाता है तो शिक्षकों को उसकी फोटो लेकर, तुरंत पंचनामा बनाते हुए एसडीएम को अवगत कराना होगा. शिक्षकों का कहना है कि अधिकारी का आदेश है तो उन्हें ये काम करना ही होगा. हालांकि, इसके कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है. इस आदेश की अध्यापक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेन्द्र त्रिपाठी ने जमकर आलोचना की है. उनका कहना है कि शिक्षकों की ड्यूटी इस काम में नहीं लगानी चाहिए. साथ ही लोगों की निगरानी करना और फोटो खींचना समाज और संस्कृति के खिलाफ है. हम इसके खिलाफ कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेंगे. वहीं मामले में एसडीएम एमपी बरार ने सफाई पेश की है. उनका कहना है कि इस मामले में विवाद जैसी कोई बात नहीं हैं. उन्होंने कहा कि, फोटो खींचे जाने के आदेश का मतलब ये नहीं है कि किसी का शौच के दौरान फोटो लेना है. जब कोई शख्स खुले में शौच कर वापस लौट रहा हो तब उसे समझाइश दी जाएगी, यदि वो तब भी न मानें तो उसके लौटने पर ग्रामीणों के सामने फोटो लेकर पंचनामा बनाया जाएगा. ताकि लोग खुले में शौच जाने से बचें.

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