कोर्ट ने दिया सात लाख मुआवजा देने का निर्देश

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः एक अस्पताल द्वारा बिना जरूरत पेसमेकर लगाने के मामले में पीड़ित दिल्ली पुलिस के एक कर्मी को अदालत ने बतौर मुआवजा करीब 7 लाख रपए देने का निर्देश दिया है। उपभोक्ता विवाद फोरम ने अस्पताल के इस कृत्य को चिकित्सा नैतिकता के खिलाफ बताया है। न्यायमूर्ति एनके गोयल की अध्यक्षता वाली दक्षिण दिल्ली जिला उपभोक्ता विवाद निपटारा फोरम ने रोहिणी स्थित सरोज हास्पिटल एंड हार्ट इंस्टीट्यूट को रवींद्र सिंह पवार को 7,24,135 रपए का भुगतान करने को कहा है। पवार उस समय दिल्ली पुलिस मुख्यालय में जनसंपर्क अधिकारी थे। बेंच ने अस्पताल को लाभ अर्जित करने के लिए आवश्यकता नहीं होने के बावजूद उपकरण लगाने का दोषी ठहराया। पीठ ने अस्पताल को अनुचित व्यापार व्यवहार का भी दोषी ठहराया। फोरम ने अपने आदेश में अस्पताल को निर्देश दिया कि वह पवार द्वारा खर्च की गयी रकम (5,24,135 रपए) उन्हें लौटाए। इसके अलावा उनको हुई मानसिक व शारीरिक परेशानी तथा मुकदमे पर आए खर्च के मुआवजे के तौर पर दो लाख रपए देने को कहा। पवार की शिकायत के अनुसार उन्हें 2003 और 2005 में दो बार दिल का दौरा पड़ा था। सितम्बर 2006 में एक बार फिर उनके सीने में दर्द हुआ और उन्हें अस्पताल ले जाया गया। शिकायत के अनुसार उनका आपरेशन किया गया और स्थायी पेसमेकर लगाया गया। इसके लिए अस्पताल ने 5,24,135 रपए लिए। इसमें कहा गया है कि बाद में केंद्र सरकार स्वास्य योजना (सीजीएचएस) के तहत रकम की वापसी के लिए बिल जमा किया। इस पर उन्हें सूचित किया गया कि मेडिकल विशेषज्ञों की स्थायी समिति ने उपकरण लगाने की सिफारिश नहीं की थी।

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