जाट आरक्षण को लेकर आज है हाईकोर्ट में सुनवाई

पानीपत, हरियाणा/नगर संवाददाताः  जाटों समेत 6 जातियों (जाट, जट्ट सिख, रोड़, त्यागी, बिश्नोई , मुल्ला जाट) के आरक्षण पर सोमवार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। इससे पहले 17 जून को हुई सुनवाई में कोर्ट ने स्टे हटाने से मना कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि आरक्षण हटा दिया तो याचिका पर फैसला देने जैसा होगा।
– 17 जून को हुई सुनवाई में सरकार की ओर से रोक हटाने को लेकर जल्द सुनवाई करने की अपील की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने फौरन कोई राहत नहीं दी थी।
– इस बीच जस्टिस एम जियापॉल के साथ खंडपीठ में शामिल जस्टिस अमित रावल ने जाट आरक्षण को चुनौती मामले से खुद को अलग कर लिया था। क्योंकि जस्टिस रावल ने फरवरी में हुए आंदोलन के दौरान हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश एसजे वजीफदार को पत्र लिखा था।
– उन्होंने लिखा था कि हरियाणा में हालात नियंत्रण के बाहर थे। केंद्र और प्रदेश सरकार मूकदर्शक बनी रहीं और आंदोलनकारी उपद्रव करते रहे। अपने उसी पत्र का हवाला देते हुए जस्टिस रावल ने बेंच से खुद को अलग कर लिया।
– पिटीशन में कहा गया है, ‘हरियाणा में जाटों को आरक्षण देने का आधार बनाई गई पिछड़ा वर्ग आयोग की केसी गुप्ता रिपोर्ट को सुप्रीम कोर्ट खारिज कर चुका है फिर इस रिपोर्ट के आधार पर आरक्षण क्यों लागू किया गया है।’
– पिटीशन में आरोप लगाया गया कि हरियाणा सरकार की तरफ से जाटों के दबाव में उनको आरक्षण दिया गया है।
– पिटीशन के अनुसार सुप्रीम कोर्ट पहले ही जाटों को आरक्षण देने की नीति को रद्द कर चुका है।
– राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग सुप्रीम कोर्ट में यह कह चुका है कि जाट पिछड़े नहीं हैं। सेना, शिक्षा संस्थानों व सरकारी सेवा में जाट ऊंची पोस्ट पर हैं।
– पिटीशन में कहा गया कि इंद्रा साहनी केस में सुप्रीम कोर्ट स्पष्ट कर चुका है कि 50 प्रतिशत से ज्यादा आरक्षण नहीं दिया जा सकता।
– हरियाणा सरकार के इस फैसले के बाद यह सीमा 70% पार कर दी।
– पिटीशन में ये भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 1992 में एक फैसले में कहा था कि सरकारी नौकरियों में आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकता।
– ऐसे में जाटों को दिया आरक्षण खारिज किया जाए।

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