पत्रकारिता करना अपनी जान जोखिम में डालने जैास

जालोर, राजस्थान/कृष्ण देवासीः आज अगर पत्रकारिता की बात की जाए तो ग्रामीण इलाकों में पत्रकारिता करना अपनी जान जोखिम मे डालने जैसा है। ऐसा ही एक वाकया मेघनगर के रंभापुर में हुआ जहां पत्रिका के पत्रकार देवीसिंह को चंद लोगों ने मारा मगर अगले दिन पत्रिका में मात्र 5 लाइनों का समाचार देने का यह सिला की उसके समाचार को मात्र 5 लाइनों में समाप्त कर दिया जाए। ऐसे में इस पत्रकार के साथ हुई घटना को प्रमुखता से प्रकाशित करना था। मगर ऐसा नहीं हुआ। ऐसे में ग्रामीण इलाके का पत्रकार अपने आप को ठगा सा महसूस करता है। ऐसे में ग्रामीण स्तर का पत्रकार यह सोचने को मजबूर हो जाता है कि वह पत्रकारिता करें या नहीं। ये समझकर परे है इस पत्रकार के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद ग्रामीण पत्रकारिता करने वाले व्यक्तियों के मन में सवाल पैदा होने लगे है।

Share This Post

Post Comment