गीत

गीत

बाबाराजः यह सच्चे वीरों की धरती है, यहां प्रीति दिलों में रहती है।
यहां सच्चाई कुछ ज्यादा है, जो भारत की मर्यादा है।
यहां प्रकृति रंग बदलती है, यह सच्चे वीरों की धरती है।
यहां सत्य प्रतीक दीवाली है, और बसंत बहार निराली है।
यहां बच्चों से खिलती गलियां है, बागों में महकती कलियां है।
यहां गंगा कर कलकल बहती है, यह सच्चे वीरों की धरती है।
यहां कोयल की मीठी बोल है, और रंगीन दिलों की होली है।
सीमा पर दनकती गोली है, मतवाले वीरो की टोली है।
हर आंगन में खुशी थिरकती है, यह सच्चे वीरों की धरती है।

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