अतीत की बाधाओं’ को पीछे छोड़ना चाहिए- प्रधानमंत्री

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को ‘अतीत की बाधाओं’ को पीछे छोड़ना चाहिए क्योंकि ‘भविष्य का आधार ठोस’ बन चुका है. अपने चिर परिचित सफेद कुर्ता पायजामा और स्लेटी रंग की जैकेट पहने मोदी का अमेरिकी सांसदों ने गर्मजोशी से स्वागत किया. उनके संबोधन के दौरान बीच बीच में 66 दफा तालियां बजाकर उनका उत्साह बढ़ाया. कई बार खड़े होकर गर्मजोशी भरा भाव प्रकट किया. सांसदों ने मोदी का ऑटोग्राफ भी लिया. जब 2005 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया था तब उनके भाषण के दौरान 33 बार तालियां बजी थीं. तत्कालीन प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार संजय बारू ने यह बात बतायी. प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और अमेरिका विश्व शांति और समृद्धि की परिदृष्टि को साझा करते हैं . उन्होंने कहा कि पूरे विश्व के समक्ष आतंकवाद सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है और इससे कई स्तरों पर लड़ा जाना चाहिए क्योंकि पारंपरिक सैन्य, खुफिया या कूटनीतिक उपाय अकेले इन्हें परास्त करने के लिए पर्याप्त नहीं है. मोदी ने कहा, ‘‘भारत की पश्चिमी सीमा से अफ्रीका तक यह अलग अलग नामों से है. यह लश्कर ए तैयबा से तालिबान और फिर आईएसआईएस के अलग अलग नामों से हैं. लेकिन इनकी विचारधारा एक है, यह घृणा, हत्या और हिंसा की

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