सत्याग्रहियों के बीच हुई मुठभेड़, 2 पुलिस अधिकारियों की मौत

मथुरा, युपी/आशीष सोनीः मथुरा के जवाहर बाग में पुलिस और कथित सत्याग्रहियों के बीच हुई मुठभेड़ में जहां दो पुलिस अधिकारियों की मौत हो गई वहीं 22 के करीब सत्याग्रहियों को भी अपनी जान से हाथ धोना पड़ा। पुलिस हालांक‌ि अभी और सत्याग्रहियों की मौत की आशंका से इंकार नहीं कर रही है लेकिन बड़ा सवाल ये है कि इस सारे फसाद की जड़ सत्याग्रहियों का नेता रामवृक्ष यादव भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया या अन्य लोगों की तरह भागने में सफल रहा है। यह सवाल इसलिए भी खड़ा हो जाता है कि न पुलिस उसके मरने की पुष्टि कर रही है और नही उसके फरार होने की। पुलिस की लिखा-पढ़त में उसके गिरफ्तार होने का भी जिक्र नहीं है। हालांकि संभावना इस बात की ही जताई जा रही है कि पुलिस के साथ मुठभेड़ में उसकी मौत हो चुकी है। सूत्रों द्वारा पता चला है कि जब संतोष कुमार ने दम तोड़ा था तभी साथी पुलिस कर्मी बौखला गए थे और उसी समय यादव पर निशाना लगाया गया था । अंदरखाने पुलिस सूत्रों से जो जानकारी मिली उसके अनुसार जिस समय पुलिस ने जवाहर बाग में प्रवेश किया उस दौरान सत्याग्रहियों की ओर से अचानक फायरिंग शुरू कर दी गई, एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी उस दौरान पुलिस का नेतृत्व कर रहे थे, फराह एसओ संतोष यादव भी उनके साथ चल रहे थे। फायरिंग होते देख संतोष यादव ने बहादुरी दिखाते हुए एसपी सिटी को बचाने का प्रयास किया, इस चक्कर में कई गोलियां उन्हें भी लगी। बाद में दोनों पुलिस अधिकारीयों ने दम तोड़ दिया लेकिन साथी पुलिस कर्मियों ने राम वृक्ष को भी नहीं छोड़ा । नेतृत्व कर रहे दोनों अधिकारियों को सत्याग्रहियों की गोली का निशाना बनता देख पुलिस ने आपा खो दिया और सत्याग्रहियों की ओर अपनी रायफलों का मुंह खोल दिया। बताया जा रहा है कि पुलिस पर पहली फायरिंग करने वाला रामवृक्ष यादव ही था जो पुलिस की जवाबी कार्रवाई में मारा गया। हालांकि पुलिस ने अभी तक इसकी पुष्टि नहीं की। पुलिस की इस चुप्पी के कारण अभी तक रामवृक्ष की मौत पर संदेह बना हुआ है। संदेह इसलिए भी गहरा गया कि जब डीजीपी जावीद अहमद ने अपनी प्रेस कान्फ्रेंस की तो रामवृक्ष को लेकर सीधे कोई जिक्र नहीं किया।

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