भागलपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की घोषणा की

पटना, बिहार/नगर संवाददाताः भागलपुर बिहार का पहला स्मार्ट सिटी होगा। मंगलवार को केन्द्रीय शहरी विकास मंत्री एम. वेंकैया नायडू ने मंगलवार को सूबे के तीसरे सबसे बड़े शहर भागलपुर को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित करने की घोषणा की। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने पटना समेत सात राज्यों की राजधानियों को स्मार्ट सिटी की अगली प्रतिस्पर्धा में एक बार फिर शामिल होने की अनुमति दी है। इस फैसले से पटना के भी स्मार्ट बनने की आस जग गई है। हालांकि पटना को इस दौड़ में सफल होने के लिए आधारभूत और जन सुविधाओं में अामूलचूल सुधार लाना होगा। केन्द्र द्वारा चुने गए 100 शहरों की सूची में बिहार से तीन शहर थे। लेकिन 20 शहरों की पहली सूची से ये तीनों शहर भागलपुर, मुजफ्फरपुर और बिहारशरीफ बाहर हो गए थे। केन्द्र ने अप्रैल में छूटे हुए राज्यों के शहरों के लिए फास्ट ट्रैक प्रतियोगिता आयोजित की थी। इसमें 23 शहरों को स्थान मिला था। निर्धारित 85 में से 35 अंक पाने से पटना स्मार्ट सिटी की दौड़ में पिछड़ गया था। 15 योजनाओं की स्थिति के आधार पर शहरी निकाय को खुद ही मूल्यांकन करना था। 15 में से 7 आधार तो ऐसे थे, जिसमें पटना को शून्य अंक मिले थे। पिछले साल जून में यह सर्वे हुआ था। भागलपुर ने 85 में से 65 अंक खुद को दिया था। शौचालय, ऑनलाइन सर्विसेज, ई-न्यूज लेटर, ऑनलाइन बजट, कंसल्टेशन, पेनाल्टी, रेवेन्यू ट्रेंड, सैलरी, ऑडिट, खुद के रेवेन्यू के मामले में पटना को 0 अंक मिले थे। नगर निगम के आयुक्त शीर्षत कपिल अशोक भी मानते हैं कि ठीक कार्यप्रणाली नहीं होने से हम पिछड़ रहे थे। जून, 2015 के बाद स्मार्ट सिटी की शर्तों के अनुरूप कई काम हुए भी हैं। भागलपुर ने विकास जो खाका पेश किया है, उसपर 1325 करोड़ खर्च आएगा। अगले पांच साल तक शहर की सूरत सुधारने के लिए प्रति वर्ष 200 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। इसमें 100 करोड़ रुपए केन्द्र और 100 करोड़ रुपए राज्य सरकार देगी। भागलपुर के अलावा रांची, लखनऊ चंडीगढ़, न्यू टाउन कोलकाता, रायपुर, वारंगल, धर्मशाला, पणजी, अगरतला, फरीदाबाद, इंफाल और पोर्ट ब्लेयर 13 शहरों में शािमल हैं। चुने गए 13 में चार शहर भाजपा शासित राज्यों से हैं, जबकि नौ विपक्षी शासित राज्यों से हैं।

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