चिंता नहीं चिंतन किया आशुतोष महाराज के भक्तों ने

नई दिल्ली/अरविंद यादवः महाकाल की महानगरी उज्जैन में लगभग 4 बजे मेघों की गर्जना शुरू हुई और कुछ ही समय में भयंकर तूफ़ान में कई शिविर ध्वस्त हो गए! लेकिन वहीँ दूसरी ओर दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान के शिविर में अपने नियमित समय पर कथाव्यास साध्वी गरिमा भारती जी एवं संत समाज द्वारा शिव कथा का प्रारम्भ हुआ! एक ओर कथा पंडाल के बहार बारिश का विकराल स्वरुप था लेकिन भीतर बैठे भक्त हर-हर भोला, हर-हर महादेव के बुलंद जयघोष लगाकर नाच रहे थे, झूम रहे थे, महाकाल के समक्ष भाव-विभोर हुए प्रार्थना में रत थे, किसी के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी और न ही कहीं किसी भी प्रकार की भगदड़ दिखाई दी! ऐसा प्रतीत हो रहा था की आशुतोष महाराज जी के भक्त चिंता नहीं चिंतन में मस्त हुए व्यवस्था को सुचारू करने में जुटे हुए थे! भयंकर आंधी तूफ़ान के थपेड़ों में भी दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान के युवा सेनानी तस से मस नहीं हुए! कोई कथा पंडाल के भीतर पानी को भीतर जाने से रोक रहा था तो कोई तम्बू पर चढ़कर पानी के बहाव को बाहर की ओर धकेलता हुआ नज़रआ रहा था!

श्री आशुतोष महाराज जी के युवा शिष्यों/ सेवादारों ने अनेक शिवरों में जा कर भी सेवा कार्य कर, समाज कल्याण के लिए अपने कदम बढाएं!

देखते ही देखते गीली जमीन को भी सभी भक्तों ने मिलकर समतल कर दिया और इस महा तांडव में भी शिव कथा निर्बाधित रूप से संपन्न हुई! यह निस्वार्थ सेवा एवं अपने गुरु देव श्री आशुतोष महाराज जी के प्रति पूर्ण निष्ठां व् विशवास का प्रत्यक्ष प्रमाण था! यही कारण था कि शिविर की व्यवस्था ज्यों की त्यों बानी रही!

कथा के उपरान्त दिव्य ज्योति जाग्रति संसथान के सचिव स्वामी नरेंद्रानंद जी ने इस विध्वंसकारी घटना में घायल व् दिवंगत आत्मतओं को शद्धांजलि दी व सामूहिक रूप से उनके लिए प्रार्थना भी की गई!

इतना ही नहीं सिंहस्थ महाकुंभ में यात्रा कर रहे शरणार्थी भक्तजन भी संसथान के शिविर को व्यवस्थित व सुरक्षित देखकर यहाँ शरण लेने पहुंचे! शिविर में सभी श्रद्धालुओं के लिए भोजन हेतु अन्न -क्षेत्र निरन्तर चल रहा है व् उनके रहने की संभव व्यवस्था भी की जा रही है!

यह वसुधैव कुटुंबकम के भाव से परिपूर्ण आपदा – प्रबंधन का स्पष्ट परिचायक है!

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