हरीश रावत को अपनी सरकार बचाने का मिल एक और मौका

नई दिल्ली/नगर संवाददाताः उत्तराखंड में हरीश रावत को अपनी सरकार बचाने का एक और मौका मिल गया है. बहुमत साबित करने के सवाल पर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी सहमति जताई है. और अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक हरीश रावत को मंगलवार यानी 10 मई को सुबह 11 बजे सूब की विधानसभा में अपना बहुमत साबित करना है. हरीश रावत के लिए राहत की खबर ये भी है कि सुप्रीम कोर्ट ने 9 बागी विधायकों को वोटिंग में हिस्सा लेने से रोक दिया है. स्पीकर पहले ही कांग्रेस के इन बागी विधायकों को अयोग्य करार दे चुके हैं. इससे पहले, केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि केंद्र सरकार फ्लोर टेस्ट के लिए तैयार है. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से अपील की कि इसके लिए कोई प्रवेक्षक नियुक्त किया जाए. मुकुल रोहतगी ने कहा, “विधानसभा का एक ही एजेंडा होना चाहिए और प्रवेक्षक पूर्व चुनाव आयुक्त होना चाहिए. ”अटॉर्नी जनरल ने आगे कहा, “विधानसभा में दो राजनीतिक दलों के गठबंधन की ताकत का टेस्ट होना चाहिए.” हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि ये फ्लोर टेस्ट सिर्फ हरीश रावत सरकार के लिए है. रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट से ये भी कहा है कि फ्लोर टेस्ट के दौरान भी राष्ट्रपति शासन को नहीं हटाया जाए. आपको बता दें कि पिछले दिनों उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन हटाने का आदेश दिया था जिसपर सुप्रीम कोर्ट की रोक लगा दी. राज्य में 27 मार्च से ही राष्ट्रपति शासन लागू है. बता दें कि उत्तराखंड में पिछले महीने कांग्रेस के 9 विधायक बागी हो गए थे जिसके बाद सरकार अल्पमत में आ गई थी. काफी राजनीतिक उथलपुथल के बाद केंद्र ने राष्ट्रपति शासन लगाया था. उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति शासन को हटाते हुए केंद्र सरकार को फटकार लगाई थी. इसी फैसले के खिलाफ केंद्र सुप्रीम कोर्ट गया था जहां सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति शासन बरकरार रखा था. अभी भी राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा हुआ है.

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