दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन

दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से श्रीमद् भागवत कथा का भव्य आयोजन

नई दिल्ली/अरविंद यादवः श्री राम राज्य गौशाला के पीछे, उजड़खेडा-1, बड़नगर रोड़, उज्जैन में दिनांक 24 से 30 अपै्रल, 2016 तक ‘श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ’ का भव्य व विशाल आयोजन किया जा रहा है। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या भागवताचार्या महामनस्विनी विदुषी सुश्री आस्था भारती जी ने कथा के प्रथम दिवस श्रीमद्भागवतकथा का महात्मय बताते हुए कहा कि श्रीमद् भागवात एक ऐसी अमृत कथा है जो देवताओं के लिए भी दुर्लभ है। उन्हांेेने कहा कि वेद-ग्रंथ युगों-युगों से मानव जाति का कल्याण करते रहे हैं। ‘भागवत महापुराण’ यह उसी सनातन ज्ञान की पयस्विनी है जो वेदों से प्रवाहित होती चली आ रही है। इसीलिए भागवत महापुराण को वेदों का सार भी कहा गया है। साध्वी जी ने श्रीमद्भागवत महापुराण की व्याख्या करते हुए बताया कि श्रीमद्भागवत अर्थात जो श्री से युक्त है। श्री अर्थात् चैतन्य, सौन्दर्य, ऐश्वर्य। ‘भगवतः प्रोक्तम् इति भागवत।’ भाव भगवानकी वह वाणी, वह कथा जो हमारे जड़वत जीवन में चैतन्यता का संचार करती है। सम्पूर्ण पापों का नाश करती हैं। जो हमारे जीवन को सुन्दर बनाती है ऐसी श्रीमद्भागवत कथा को केवलमृत्युलोक में ही प्राप्त करना संभव है। कथा के दौरान उन्होंने वृन्दावन का अर्थ बताते हुए कहा कि वृन्दावन इंसान का मन है। कभी-कभी इंसान के मन में भक्ति जागृत होती है। परन्तु वह जागृति स्थाई नहीं होती। इसका कारण यह है कि हम ईश्वर की भक्ति तो करते हैं पर हमारे अंदर वैराग्य व ज्ञान का अभाव होता है। इसलिए वृन्दावन में जा कर भक्ति देवी तो तरुणी हो गई पर उसके पुत्रा ज्ञान और वैराग्य अचेत और निर्बल ही रहे। उनमें जीवंतता और चैतन्यता का संचार करने हेतु नारद जी ने भागवत कथा का ही अनुष्ठान किया। जिसको श्रवण कर वे पुनः जीवन्त और सबल हो उठे। जब तक जीवन में नारद जी की ही भांति पूर्ण ब्रह्मज्ञानी संत नहीं आते तब तक जीवन में भक्ति अर्थात् ईश्वर का साक्षात्कार कर पाना असंभव है। संत ही हमें ईश्वर से मिलने का वह मार्ग पद्रान करते हैं। जिस सनातन पुरातन मार्ग पर चलकर हम उस ईश्वर को देख पाते हैं, जान पाते हैं। कथा श्रवण की चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि भागवत कथा एक कल्पवृक्ष की भाँति है जो जिस भाव से कथा श्रवण करता है, वह उसे मनोवांछित पफल देती है और यह निर्णय हमारे हाथ में है कि हम संसार की माँग करते हैं या भगवान की। साध्वी जी नेे भीष्म देह त्याग के मार्मिक प्रसंग से भक्तों को भाव विभोर कर दिया। जिसे श्रवण कर सभी के हृदयों में प्रभु को प्राप्त करने की प्रार्थना प्रबल हो उठी।इस भव्य कथा द्वारा श्रद्धालुगण 24 से 30 अप्रैल, 2016 तक प्रभु के अनेक रूपों और लीलाओं का आनंद लेते हुए अपने जीवन को लाभान्वित कर पायेंगे।

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