शताब्दियों का साक्षी और ऐतिहासिक धरोहर बना क्षेमंकरी माता मंदिर

जालोर, राजस्थान/पृथ्वी सिंहः भीनमाल से पश्चिम की ओर करीब दो किलोमीटर दूर पहाड़ी की चोटी पर स्थित क्षेमंकरी माता का मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केन्द्र है। यह मंदिर शताब्दियों का साक्षी व प्राचीन धरोहर है। यहाँ पर श्रद्धालुओं का आवागमन बढ़ा है, यहाँ पर श्रदालु दूर दरजो से आते है वही क्षेमंकरी माता मंदिर में दर्शन करने के लिए हर माह शुक्ल पक्ष में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। कई शताब्दियों पहले स्थापित इस मंदिर का इतिहास भी लोकगाथाओं, जनश्रुतियों तथा धार्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत रहा है। वर्तमान भीनमाल जो किसी समय में श्रीमाल, फूलमाल, रत्नमाल, भीलमाल वभीनमाल आदि नामों से जाना जाता था। इन्हीं के साथ लोकगाथाएं व जनश्रुतियां भले ही थोड़ी बहुत बदल गई हो, लेकिन उनका सार यथावत ही है। श्रीमाल पुराण में पहाड़ी पर स्थित क्षेमंकरी माता के मंदिर के बारे में तथा इसकी स्थापना के बारे में वर्णन मिलता है। जब लोग शांतिपूर्वक जीवनयापन कर रहे थे, तो उस समय एक अमौजा (उत्मौजा) नामक राक्षस या दैत्य ने वहां पर अशांति व हिंसा का तांडव मचा दिया था। जिस पर वहां तपस्या कर रहे हजारों तपस्वियों तथा श्रीमाली ब्राह्मणों ने देवी का आहवान किया। उसके फलस्वरूप एक शक्ति का प्रकटय हुआ जिसने इस राक्षस को मार कर उसे एक पहाड़ी के नीचे डालकर वहाँ पगरखी रखी। इसलिये यहाँ पर पगरखी का दान बड़ा दान माना जाता है। क्षेमंकरी माता मंदिर पर हर माह शुक्ल पक्ष में श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ता है। मंदिर में दर्शनार्थ सालभर मे दर्जनों पैदल संघ भी पहुंचते है। एवं रक्षा-बंधन पर्व पर मंदिर परिसर में मेले का आयोजन भी होता है। नवरात्रों में मंदिर में दिनभर श्रद्धालुओं की आवाजाही लगी रहती है। यहां पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना कर घूघरी व मातर की प्रसादी का भोग लगाते है। भीनमाल शहर सहित दूर दराज और गुजरात प्रांत से भी श्रद्धालु काफी संख्या में पहुंचते है। मंदिर ट्रस्ट की ओर से यहां पर पहाड़ी की चोटी, सीढि़यों व तलहटी पर कई विकास कार्य करवाएं है। क्षेमंकरी माता मंदिर ट्रस्ट की ओर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए ठहरने व भोजन की व्यवस्था की हुई है। मंदिर में श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए विश्रामगृह व कमरें बने हुए है। पहाड़ी की चोटी पर चढ़ने-उतरने के लिए बनी सीढि़यों में जगह-जगह छाया व पानी की व्यवस्था की गई है। शारदीय नवरात्रों में मंदिर को आकर्षक रोशनी से सजाया जाता है। शारदीय नवरात्रों में यहां भक्ति संध्या व गरबा नृत्य का भी आयोजन होता है। पहाड़ी की चोटी पर वाहनों के आवाजाही के लिए सड़क बने हुए है।

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